#Petrol की कीमतों पर लगी ब्रेक , दबाव के आगे झुकी #ModiGovernment

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PETROL PRICE HIKE

#Petrol की कीमतों पर लगी ब्रेक , दबाव के आगे झुकी #ModiGovernment

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#Petrol की कीमतों को लेकर हुई चोरतरफा घेराबंदी के आगे मोदी सरकार झुकती हुई नजर आ रही है तेल मार्केटिंग कंपनियों ने पिछले 15 दिनों में कच्चे तेल के दाम में तेजी व रुपए में जबरदस्त गिरावट के बावजूद पेट्रोल और डीजल के दाम नहीं बढ़ाए हैं। 12 सिंतबर को कच्चे तेल का दाम 3443 रुपए प्रति बैरल था जबकि पेट्रेल का दाम 70.38 पैसे प्रति लीटर था।

तेल कंपनियों की लागत बढ़ी है

  • आज कच्चे तेल के दाम 3728.70 रुपए प्रति बैरल है जबकि पेट्रोल के दाम महज 3 पैसे बढ़े हैं और दिल्ली में 27 सितंबर को पेट्रोल का दाम 70 रुपए 41 पैसे प्रति लीटर रहा यही हाल डीजल का भी है।
  • डीजल के दाम में 4 पैसे प्रति लीटर की गिरावट देखी गई है।
  • दिल्ली में 13 सितंबर को डीजल का भाव 58.72 रुपए प्रति लीटर था जो अब 58.68 रुपए प्रति लीटर है।
  • सरकार ने 16 जून से कच्चे तेल की अंतराष्ट्रीय कीमतों के आधार पर पेट्रोल और डीजल के दाम रोजना निर्धारित करने का फैसला किया था
  • जिस दौरान ये फैसला लागू हुआ उस दिन कच्चा तेल 2931 रुपए प्रति बैरल था जबिक पेट्रोल के भाव 65.48 रुपए प्रति लीटर थे।
  • 16 जून के बाद अबतक कच्चे तेल के दाम करीब 800 रुपए प्रति बैरल बढ़े हैं जबकि पेट्रोल की कीमतों में 4.93 रुपए प्रति लीटर के वृद्धि हुई है।
  • यदि मुंबई में पेट्रोल की कीम 80 रुपए लीटर पहुंचने के बाद सरकार पर चौतरफा दबाव न बढ़ता तो पिछले 15 दिन में तेल मार्केटिंग कंपनियां पेट्रोल और डीजल के दाम 2 से तीन रुपए प्रति लीटर तक बढ़ा देती क्योंकि कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी देखी जा रही है और रुपया भी लगातार गिर रहा है जिससे तेल कंपनियों की लागत बढ़ी है
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आरती पाण्डेय वेबसाइट की संपादक हैं। यह देश में चल रही राजनीतिक हलचलों पर निगाह रखती हैं। कई बडी और सनसनी खबरों को पहले बे्रक करने का श्रेय आरती पाण्डेय को जाता है। निष्पक्ष और तथ्यपरक रिपोर्टिंग इनकी खासियत है। साथ ही स्थानीय और देश की समस्याओं की ओर भी इनका फोकस रहता है।

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