जीएसटी से मिठाई को ‘फीकी’ करने की तैयारी

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GST

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गुड्स ऐंड सर्विसेज टैक्स (जी.एस.टी.) के तहत अधिकतर वस्तुओं की टैक्स दरों को लेकर केंद्र और राज्यों के बीच सहमति बन गई है। श्रीनगर में गुरुवार को शुरू हुई दो दिवसीय जी.एस.टी. काउंसिल की बैठक में रोजमर्रा की चीजों पर टैक्स रेट घटाने का फैसला लिया गया। नए टैक्स सिस्टम के तहत कई जरूरी चीजों की कीमतें कम हो सकती हैं। अनाज और दूध को टैक्स मुक्त कर दिया गया है। प्रोसेस्ड फूड भी सस्ते हो जाएंगे। 1 जुलाई से मिठाई पर भी 5% टैक्स देना होगा।  एसी और फ्रिज को 28% के स्लैब में रखा गया है। लाइफ सेविंग ड्रग्स को सबसे कम 5% की स्लैब में डाला गया है।

एेसे लगेगा इन चीजों पर टैक्स
गेहूं-चावल समेत अनाज, दूध और दही को GST के दायरे से बाहर रखा गया है। कुछ राज्यों में अनाज पर VAT लगता है। वहां 1 जुलाई से GST लागू होने के बाद अनाज सस्ता हो जाएगा।

[td_smart_list_end] कोयले पर अभी 11.69% टैक्स लगता है। लेकिन, GST आने पर यह टैक्स सिर्फ 5% लगेगा। इससे कई राज्यों में बिजली का टैरिफ कम होने की उम्मीद है। 
 साबुन, टूथपेस्ट और हेयर ऑयल जैसी चीजें 18% टैक्स स्लैब के दायरे में आएंगी। इन चीजों पर अभी तक 22-24% तक टैक्स लगता है।
कारों को 28% के स्लैब में रखा गया है। अभी कारों पर 30-32% टैक्स लगता है। GST आने के बाद छोटी कारों पर 28% टैक्स और 1% सेस। इस तरह कुल टैक्स 29% हो जाएगा, जो अभी के मुकाबले कम ही रहेगा।
मीडियम सेगमेंट की कारों पर 28% टैक्स के अलावा 3% सेस और लग्जरी कारों पर 15% सेस लगेगा। इससे लग्जरी कारों के महंगे होने के आसार हैं।
रोजाना इस्तेमाल में आने वाले आइटम्स जैसे चाय, कॉफी (इंस्टेंट नहीं), चीनी को 5% टैक्स के स्लैब में रखा गया है। पहले भी इन पर करीब इतना ही टैक्स लगता था। इसलिए इन पर कोई असर पड़ने के आसार नहीं हैं।

 GST क्या है
अभी भी कई लोगों को इस बारे जानकारी नहीं तो आपके बता दें GST का मतलब गुड्स एंड सर्विसेज टैक्‍स है। इसको केंद्र और राज्‍यों के 17 से ज्‍यादा इनडायरेक्‍ट टैक्‍स के बदले में लागू किया जाएगा। यह देशभर में किसी भी गुड्स या सर्विसेज की मैन्‍युफैक्‍चरिंग, बिक्री और इस्‍तेमाल पर लागू होगा। सरल शब्‍दों में कहें ताे जी.एस.टी. पूरे देश के लिए इनडायरेक्‍ट टैक्‍स है, जो भारत को एक समान बाजार बनाएगा। जी.एस.टी. लागू होने पर सभी राज्यों में लगभग सभी गुड्स एक ही कीमत पर मिलेंगे। अभी एक ही चीज के लिए दो राज्यों में अलग-अलग कीमत चुकानी पड़ती हैं। इसकी वजह अलग-अलग राज्यों में लगने वाले टैक्स हैं। इसके लागू होने के बाद देश बहुत हद तक सिंगल मार्केट बन जाएगा।

 

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