KANPUR BREAKING NEWS : कला का पुरवा, थाना सचेण्डी निवासी संदीप सिंह की तहरीर पर दर्ज भूमि विवाद प्रकरण की विवेचना पूरी कर पुलिस ने सात अभियुक्तों के विरुद्ध आरोप पत्र दाखिल किया है। मामला स्व. गंगा सिंह के हिस्से की भूमि पर फर्जी रजिस्ट्री कराने और दानपत्र को लेकर खड़ा हुआ, जिसमें राजस्वकर्मियों की मिलीभगत भी सामने आई है।
जमीन का खेल करने वाले काननूगो आलोक दुबे को रिवर्ट कर बनाया लेखपाल
डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि सरकारी पद पर रहते हुए यदि कोई व्यक्ति भू-माफियाओं या बिल्डरों से मिलीभगत करता है तो वह कतई बख्शा नहीं जाएगा। ऐसे मामलों में न केवल विभागीय कार्यवाही होगी बल्कि आपराधिक मुकदमे दर्ज कर विधि अनुसार सख्त कार्रवाई सुनिश्चित कराई जाएगी।
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वादी की मां मोहनलाल उर्फ लाल साहिबा ने अपने पति के हिस्से की भूमि का कुछ भाग वसीयत और कुछ भाग दानपत्र के माध्यम से पहले ही हस्तांतरित कर दिया था। इसके बावजूद अभियुक्त राजपति देवी पत्नी रघुबीर सिंह निवासी पण्डपुर सहार पुरवा पदपुर थाना सहार जनपद औरैया व राजकुमारी देवी पत्नी स्व. निहाल सिंह निवासी ठाकुर गांव तहसील बिधुना थाना सहायल जनपद औरैया ने संपूर्ण भूमि पर दावा जताते हुए रजिस्ट्री करा दी। शेष भूमि का रजिस्टर्ड अनुबंध RNG इंफ्रा के भागीदार अमित गर्ग पुत्र प्रेम नारायण गर्ग निवासी सिविल लाइंस कानपुर के नाम किया गया। जांच में यह भी सामने आया कि जिन चेक नंबरों का उल्लेख रजिस्ट्री में हुआ, उनका भुगतान नहीं किया गया।
घटनास्थल क्षेत्र के तत्कालीन लेखपाल अरुणा द्विवेदी निवासी नौबस्ता तथा कानूनगो आलोक दुबे निवासी कल्याणपुर पर भी मिलीभगत का आरोप सिद्ध हुआ। अपर जिलाधिकारी (वि/रा) की त्रिस्तरीय जांच रिपोर्ट में यह पाया गया कि दोनों ने यह जानते हुए भी कि विवादित भूमि खतौनी में राजपति और राजकुमारी के नाम दर्ज नहीं है, अनुचित लाभ पहुँचाने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार कराए। न्यायालय को धोखे में रखकर नाम चढ़ाने का आदेश कराया गया और उसी दिन रजिस्ट्री भी करा ली गई।
विवेचना के दौरान गवाहों के बयान, घटनास्थल निरीक्षण, वसीयतनामा, दानपत्र, खतौनियां, बैंक स्टेटमेंट और अन्य दस्तावेजों का अवलोकन किया गया। यह भी स्पष्ट हुआ कि विक्रेताओं को कोई वास्तविक धन नहीं दिया गया और रजिस्ट्री में अंकित चेकों का भुगतान नहीं हुआ, जो षड्यंत्र और कूट रचना को प्रमाणित करता है। विवेचक ने यह उल्लेख किया कि चूँकि अरुणा द्विवेदी और आलोक दुबे लोक सेवक होते हुए भी यह अपराध पदीय कर्तव्यों के निर्वहन में नहीं हुआ, इसलिए अभियोजन स्वीकृति की आवश्यकता नहीं है।
विशेष बात यह है कि इस प्रकरण में संलिप्त कानूनगो आलोक दुबे को जिलाधिकारी ने पहले ही दण्डस्वरूप पदावनति देकर लेखपाल बना दिया है। आलोक दुबे पर विजिलेंस की जांच भी जारी है और अब तक की जांच में उनकी करोड़ों रुपये की अवैध संपत्ति का भी पता चला है। इससे मामले की गंभीरता और गहरी होती जा रही है।
अब अदालत में अभियुक्त के रूप में पेश होना पड़ेगा
विस्तृत विवेचना के आधार पर अभियुक्त राजपति देवी, राजकुमारी देवी, रघुबीर सिंह, अरुण सेंगर उर्फ अमन सेंगर, RNG इंफ्रा भागीदार अमित गर्ग, लेखपाल अरुणा द्विवेदी और कानूनगो आलोक दुबे के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 318(4), 338, 336(3), 340(2), 61(2), 352 और 351(3) में अपराध होता पाया गया। पुलिस ने दिनांक 11 अक्तूबर 2025 माननीय न्यायालय में प्रेषित कर दिया है।

