KANPUR IGRS RANK : एक कहावत है चिकना घडा, और यह प्रशासनिक अफसरों और कर्मचारियों पर मुफीद बैठती है। डीएम के लाख प्रयास के बाद भी आईजीआरएस रैंक में सुधार तो दूर उलटा गिर रही है।
अप्रैल में कानपुर की 61 रैंक आई थी, तो इस दफा सात अंक और नीचे गिरते हुए 68 पर पहुंच गई। मई में प्राप्तांक प्रतिशत 73.57 और 103 अंक मिले हैं। जिलाधिकारी अब लापरवाह अफसरों की सूची तैयार कर रहे हैं। इसके बाद उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। KANPUR IGRS RANK
अफसरों ने फिर किया ‘गुड़-गोबर’, आईजीआरएस रैंक बीस अंक लुढकी
निगरानी ढाक के तीन पात
लगातार जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह जनता दरबार लगाकर लोगों की शिकायत सुन रहे और अधिकारियों को आदेश निर्देश भी दे रहे हैं, लेकिन उसका असर अधिकारियों पर नहीं पड़ रहा हैं। आईजीआरएस की शिकायतें की निगरानी के लिए डीएम ने अफसरों और कर्मचारियों की फौज लगा रखी है। लेकिन निगरानी ढाक के तीन पात तक ही सीमित हो रही है।
4539 फरियादी कार्रवाई से असंतुष्ट
जिलास्तरीय अधिकारियों की लापरवाही उनकी मेहनत पर पानी फेर रही है। वहीं, चारों तहसील में आने वाली शिकायतों का भी सही तरह से निस्तारण नहीं किया जा रहा है। जिस कारण सीएम कार्यालय से लिए फीडबैक में 4539 फरियादी कार्रवाई से असंतुष्ट मिले हैं। इस कारण आईजीआरएस रैकिंग के मई माह में कानपुर नगर को 68वां स्थान मिला है।
डीएम की सख्त कार्यशैली, बीस नंबर की छलांग, जिले की 41वीं RANK
फरवरी में जिले की रैंक 61वीं थी तो मार्च दफा 41 वीं, अप्रैल में 61वीं रैंक मिली, मई में 68 पर पहुंच गई। । फरवरी में 140 में 103 अंक थे मार्च में 106 अंक मिले और अप्रैल में 103 अंक मिले । फरवरी में 73.57 प्रतिशत थे तो मार्च में 75.71 प्रतिशत अप्रैल में 73.57 अंक ।
3229 ने ही कार्रवाई से संतोष जताया
IGRS रैंकिंग में जिले का प्रदर्शन काफी निराशाजनक है। डीएम के लगातार निरीक्षण के बावजूद अधिकारी अपनी कार्यशैली में सुधार नहीं कर रहे हैं। जिससे शिकायतों का हकीकत में निस्तारण नहीं हो रहा है। जिससे जनता का फीडबैड अफसरों के प्रति काफी खराब है। मार्च माह में जिले को 41वीं रैंक मिली थी। अप्रैल माह में जिले की रैंक 61 थी। मई माह में जिले में 10,943 शिकायतें अलग-अलग विभागों की आईं। इनके निस्तारण में कुल 140 में 103 अंक मिले हैं। प्राप्तांक प्रतिशत 73.57 रहा। सीएम कार्यालय से 7,768 शिकायतों में फीडबैक लिए गए। इनमें 4,539 लोगों का असंतोषजनक फीडबैक रहा। 3229 ने ही कार्रवाई से संतोष जताया। चारों तहसील बिल्हौर, सदर, घाटमपुर व नर्वल में भी अफसर लचर तरीके से काम कर रहे हैं। जिसकी वजह की जिले की रैकिंग लगातार खराब होती जा रही है

