KANPUR NEWS : फर्जी नाम और पते के ड्रग लाइसेंस लेने वालों पर शासन ने नकेल कसने की तैयारी शुरू कर दी है।
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उन मकान मालिकों पर भी लगाम कसा जा सकता है जो यह कह कर निकल जाते है कि मुझे कुछ नहीं पता। दरअसल शासन ने यह स्पष्ट आदेश पारित किया है कि जिस भवन में मेडिकल लाइसेंस का थोक या गोदाम संचालित किया जा रहा है वह पहले ही यह पुष्टि कर ले कि किरायेदार वैध लाइसेंस लेकर कारोबार कर है कि नहीं।
ड्रग इंस्पेक्टर ओम पाल सिंह ने बताया कि यह आदेश शासन से आया कि मकान मालिक को किराएदार संबंधित यह जानकारी करना अनिवार्य है कि मेडिकल लाइसेंस है कि नहीं।
आखिर क्यों आया यह आदेश
कोडीन युक्त कफ सिरप एवं नारकोटिक्स श्रेणी की औषधियों के दुरुपयोग को रोके जाने के लिए विभाग केदो माह के अभियान में संज्ञान में आया कि कई फर्मे पंजीकृत पते पर अस्तित्वहीन है, जो लाइसेंस प्राप्त होने के पश्चात फर्म कभी संचालित ही नहीं हुईं तथा कुछ फर्मों के पंजीकृत पते पर केवल भवन स्वामी ही मौके पर मिलेए जिन्हें फर्म को प्रदत्त लाइसेंस के सन्दर्भ में कोई जानकारी नहीं थी।
क्या है आदेश
शासन की ओर से आदेश आया है कि फरवरी से प्रदेश में स्थित सभी थोक औषधि विक्रय प्रतिष्ठानों का सत्यापन किया जाना सुनिश्चित होगा साथ ही, बिन्दुओं पर जाँच करें.लाइसेंसी फर्म अपनी स्वीकृत चौहद्दी में स्थित है अथवा नहीं।
औषधियों के भण्डारण के लिये पर्याप्त व्यवस्था उपलब्ध है अथवा नहीं।
Competent Person की उपस्थिति और उनके अनुभव प्रमाण पत्र की पुष्टि।
लाइसेंसी परिसर से अन्यत्र स्थान पर दवा भण्डारण की स्थिति में अनुज्ञप्तिधारी द्वारा पृथक गोदाम का लाइसेंस प्राप्त किया गया है अथवा नहीं।
विभाग द्वारा सत्यापन कार्य शुरू किये जाने से पूर्व के इस अंतराल में कोई थोक औषधि विक्रेता अपनी फर्म को प्रदत्त लाइसेंस को अभ्यर्पित करना चाहता है तो उनके आवेदन को स्वीकार करते हुए सक्षम स्तर से निरस्तीकरण की कार्यवाही किया जाये।

