Shubh Labh : किसी भी मांगलिक कार्य में बहुत कुछ शुभ माना जाता है। इनमें से एक है शुभ संकेत। माना जाता है कि घर के बाहर शुभ-लाभ (Shubh Labh) लिखने से परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है। Shubh Labh
यहां लाभ लिखने का अर्थ है कि साधक अपनी आय और व्यापार में लाभ चाहता है। वहीं शुभ लिखने से जीवन में शुभता बनी रहती है।
दरअसल शुभ और लाभ (Shubh Labh) भगवान गणेश के दो पुत्र हैं। शास्त्रों में वर्णन मिलता है कि रिद्धि और सिद्धि जो प्रजापति विश्वकर्मा की पुत्रियां है, उनका विवाह गणेश जी से हुआ था। सिद्धि से शुभ नामक पुत्र का जन्म हुआ और वहीं रिद्धि से ‘लाभ’ का जन्म हुआ। इन्हें ही शुभ-लाभ के नाम से जाना जाता है। स्वास्तिक को भगवान गणेश का ही रूप माना गया है। यही कारण है कि शुभ-लाभ के चिन्ह स्वास्तिक के साथ बनाए जाते हैं।

शुभ-लाभ का महत्व
घर या कार्यालय में शुभ-लाभ के चिन्हों को लगाने से सुख-समृद्धि और धन का वास बना रहता है। साथ ही, भगवान गणेश की कृपा साधक पर बरसती है। इतना ही नहीं, ज्योतिष शास्त्र में भी चौघड़िया या शुभ मुहूर्त देखते समय उसमें अमृत के अलावा लाभ और शुभ मुहूर्त देखना भी जरूरी माना जाता है।
स्वास्तिक सहित शुभ-लाभ का चिन्ह ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व या उत्तर दिशा में बनाना ज्यादा शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार स्वास्तिक के दाएं-बाएं और शुभ-लाभ लिखने वास्तु दोष दूर होते हैं। इसकी जगह आप अष्टधातु या तांबे से बना स्वास्तिक चिन्ह भी अपने घर में लगा सकते हैं।
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