Akshaya Navami : इसे हिंदू कैलेंडर के अनुसार, कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष के नौवें दिन अक्षय नवमी (AkshayaNavami) को मनाया जाता है। हिंदू धर्मों से सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण अनुष्ठानों में से एक अक्षय नवमी को कहा जाता है। Akshaya Navami
कब है अक्षय नवमी?
हिंदू पंचांग के अनुसार, 30 अक्टूबर को सुबह 10:06 बजे से प्रारंभ होगी और 31 अक्टूबर को सुबह 10:03 बजे इसका समापन होगा. उदिया तिथि के आधार पर अक्षय नवमी का पर्व 31 अक्टूबर को मनाया जाएगा.
यह तिथि इसलिए विशेष मानी जाती है क्योंकि इस दिन किए गए दान, जप, तप और पूजा (Amla tree worship) के फल कभी क्षीण नहीं होते। इसलिए इसे ‘अक्षय’ कहा गया जिसका अर्थ है, जो कभी समाप्त न हो। इसे “आंवला नवमी” भी कहते हैं, क्योंकि इस दिन भगवान विष्णु (Lord Vishnu and Amla tree) आंवले के वृक्ष में निवास करते हैं।
अक्षय नवमी पर शुभ योग और मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार, इस बार अक्षय नवमी पर वृद्धि योग और और रवि योग जैसे कई शुभ योग रहने वाले हैं. 31 अक्टूबर को वृद्धि योग सुबह 06:17 बजे से पूरे दिन रहेगा. रवि योग भी दिनभर रहने वाला है. साथ ही, शिववास योग भी इस दिन को खास बना रहा है.
अक्षय नवमी के किए गए दान या किसी धर्मार्थ कार्य का लाभ व्यक्ति को वर्तमान और अगले जन्म में भी प्राप्त होता है। अक्षय नवमी देव उठनी एकादशी (Dev Uthi Ekadashi) के से दो दिन पहले मनाई जाती है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, अक्षय नवमी (AkshayaNavami) के दिन से ही सतयुग शुरु हुआ था। ऐसे में इस दिन को सत्य युगाडी भी कहा जाता है। यह अक्षय तृतीया के समान है। साथ ही यह भी कहा जाता है कि इस दिन त्रेता युग भी शुरू हुआ था और इसे त्रेता युगाडी के नाम से भी जाना जाता है। किसी भी तरह के दान-पुण्य के लिए यह दिन अनुकूल और शुभ माना जाता है।
इस वर्ष अक्षय नवमी 23 नवंबर को है। देश के कई हिस्सों में इसे आंवला नवमी भी कहा जाता है। मान्यता है कि कई देवताओं का निवास आंवले के पेड़ पर होता है। ऐसे में भक्त इनकी पूजा करते हैं। अगर पश्चिम बंगाल की बात करें तो इस दिन को जगधात्री पूजा के रूप में मनाया जाता है। इस दौरान भक्त सत्ता की देवी जगधात्री की अराधना करते हैं। कहा जाता है कि जो भक्त इस दिन मथुरा-वृंदावन की परिक्रमा करते हैं उन्हें सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। इसका लाभ पाने के लिए भक्त अनुष्ठान करते हैं।
महत्व…
अक्षय नवमी का महत्व बहुत ज्यादा है। इस पर्व को बेहद ही श्रद्धा और समर्पण के साथ मनाया जाता है। इस दिन अनुष्ठान करने से व्यक्ति की इच्छाएं पूरी होती हैं। साथ ही मोक्ष की प्राप्ति भी होती है। इस दिन दान और भिक्षा देना बेहद ही शुभ माना जाता है। अक्षय नवमी को कुष्मंद नवमी भी कहा जाता है। कथाओं के अनुसार, भगवान विष्णु ने इस दिन दानव कुष्मंड का वध किया था और ब्रह्मांड में धर्म को बहाल किया था।
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