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इस मामले में तीमारदारों ने IGRS में शिकायत की। मगर जांच अधिकारियों ने इसमें जो जांच की उसमें डॉक्टरों को किनारे रखा।

3 सदस्यीय टीम का गठन
जांच रिपोर्ट से संतुष्ट न होने पर पीड़ित ने दोबारा से ये जांच खुलवाई और डॉक्टरों के खिलाफ जांच की मांग की। इस पर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. हरि दत्त नेमी (Dr. Hari Dutt Nemi) ने 3 सदस्यीय टीम का गठन कर मामले की फिर से जांच शुरू करा दी हैं।
इन लोगों के खिलाफ होगी जांच
सीएमओ (CMO) ने इस पूरे प्रकरण की जांच के लिए 3 सदस्यीय कमेटी का गठन किया है। ये कमेटी डॉ. निर्मल पांडेय और डॉ. एके सिंह की जांच करेंगी। इन डॉक्टरों पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया गया हैं।
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कच्चा बिल दिया…
इसके बाद उन्हें तुरंत आईसीयू में डाल दिया। 12 जनवरी को पिता की इलाज के दौरान मौत हो गई। सौरभ का आरोप है कि पिता की जब मौत हो गई उसके बाद जब खर्चों का बिल मांगा तो उन्होंने कच्चा बिल दे दिया।
मौत के बाद मांगे थे 1.5लाख रुपए
बर्रा निवासी सौरभ नारायण ने बताया कि 16 दिसंबर 2024 को पिता गणेश चंद्र को रिजेंसी हॉस्पिटल में भर्ती कराया था। पिता को सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। इस डॉ. निर्मल पांडेय ने उनका एक्सरे कराया और फिर उन्हें भर्ती कर लिया। पक्का बिल मांगने पर अस्पताल प्रबंधन ने 1.5 लाख रुपए और मांगने लगे। इस पर सौरभ ने पुलिस को सूचना दे दी। सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस ने वहां पर समझौता कराकर परिजनों को शव सुपुर्द कर दिया था।
कई बार रेफर करने को कहा तो…
सौरभ का आरोप है कि रोज एक लाखों रुपए से अधिक पैसे जमा करने पर हम लोगों ने डॉ. निर्मल पांडेय से पिता को रेफर करने को कहा लेकिन डॉक्टरों ने रेफर करने की वजह वो डराते थे। डॉक्टर कहते थे कि रास्ते में ले जाओगे तो उतनी देर में कुछ भी हो सकता हैं। इसकी जिम्मेदारी मेरी नहीं हैं।

