Diwali Puja 2025: दिवाली, दीपावली या दीपोत्सव (Deepotsav) पूरे 5 दिनों तक चलता है. इस दिन लक्ष्मी-गणेश (Laxmi Ganesh puja) की एक साथ पूजा करने का विधान है. Diwali Puja 2025
हर साल दिवाली पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की नई मूर्ति खरीदी जाती है. दिवाली के दिन नई मूर्ति में पूजा-अनुष्ठान करने के बाद यह मूर्ति पूरे साल स्थापित रहती है और पुरानी मूर्ति का विसर्जन कर दिया जाता है. लेकिन क्या आपने सोचा है कि आखिर हर साल दिवाली में नई मूर्ति में ही क्यों होती है लक्ष्मी गणेश की पूजा. आखिर क्या है इसके पीछे का कारण या मान्यता.
क्यों खरीदी जाती है नई मूर्ति
दिवाली में लक्ष्मी-गणेश की वही मूर्ति नई खरीदी जाती है जोकि मिट्टी से बनी होती है. सोना, चांदी या पीतल जैसे धातुओं की मूर्ति को नहीं बदला जाता है. वहीं आमतौर पर जब गणेशोत्सव या दुर्गोत्सव में देवी-देवताओं की मूर्ति स्थापित होती है तो उसका विसर्जन दस दिनों में कर दिया जाता है. लेकिन दिवाली पर लक्ष्मी-गणेश की स्थापित मूर्ति पूरे साल रहती है.
दरअसल प्राचीन काल में मिट्टी से बनी मूर्तियों में पूजा करने का अधिक प्रचलन था. जो सालभर रखने के बाद खंडित, खराब या बदरंग सी हो जाया करती थी. इसलिए दिवाली के शुभ मौके पर मूर्ति का विसर्जन कर नई मूर्ति लाई जाती थी. इसके बाद से दिवाली पर हर साल नई मूर्ति खरीदने की परंपरा की शुरुआत हो गई.
कब खरीदें मूर्ति
बता दें कि दिवाली में लक्ष्मी-गणेश की नई मूर्ति खरीदने के लिए धनतेरस का दिन सबसे शुभ माना जाता है. आप धनतेरस में अन्य वस्तुओं की शॉपिंग (Dhanteras) के साथ ही इस दिन लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति भी खरीद सकते हैं.
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