Jitiya 2025: जीवित्पुत्रिका व्रत- जितिया पर्व रविवार 14 सितंबर को पुत्रवती महिलाएं निर्जला रहकर यह व्रत करेंगी। इसके एक दिन पूर्व शनिवार को नहाय-खाय के साथ व्रत की शुरुआत होगी। Jitiya 2025
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इस पर्व में अपने पुत्र की लंबी उम्र और सुखी जीवन की कामना करते हुए पूरे चौबीस घंटे निर्जला उपवास कर व्रत रहती हैं।
अश्विन मास के कृष्ण पक्ष अष्टमी को रखते हैं जितिया व्रत
अश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 14 सितंबर रविवार को प्रातः 8:51 बजे आरंभ होकर 15 सितंबर सोमवार को प्रातः 5:36 बजे समाप्त होगी। रविवार को सूर्योदय से पहले महिलाएं ओठगन करेंगी और सोमवार को प्रातः 6:27 बजे के बाद व्रत का पारण होगा। यह पर्व मुख्य रूप से बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और बंगाल में बड़ी श्रद्धा और उत्साह से मनाया जाता है।
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जितिया पर्व से जुड़ी परंपरा और महत्व
तिलकामांझी महावीर मंदिर के पंडित आनंद झा के अनुसार, नवविवाहिता को इस दिन मायके से विशेष भार आता है जिसमें कपड़े और ओठगन के लिए दही-चूड़ा सहित सामग्री होती है। घर के बच्चों में भी इस पर्व को लेकर उत्साह रहता है। यह व्रत प्राचीन काल से संतान रक्षा हेतु किया जाता है। व्रती महिलाएं गंगा, तालाब या घर पर स्नान कर पितरों का स्मरण करती हैं और सात्विक भोजन ग्रहण कर व्रत प्रारंभ करती हैं।
जितिया व्रत कथा
जितिया की कथा के अनुसार, गंधर्व राजकुमार जीमूतवाहन को उनके पिता के वन जाने के बाद राजा बनाया गया. जीमूतवाहन में भी अपने पिता के समान ही गुण थे. वे भी परोपकारी और दयालु स्वभाव के थे. उन्होंने लंबे समय तक अपने राज्य पर शासन किया और प्रजा की सेवा की. फिर वे भी अपने पिता की तरह राजपाट छोड़कर वन चले गए.
वन में काफी समय व्यतीत करने के बाद एक दिन जीमूतवाहन की मुलाकात एक वृद्धि महिला से हुई, जो नाग वंश की थी. वह काफी डरी हुई थी. जीमूतवाहन ने उससे पूछा कि वो भयभीत और चिंतित क्यों है? तो उसने बताया कि नाग वंश के लोगों ने पक्षरीज गरुड़ से समझौता किया है कि उनके आहार के लिए नाग वंश का एक सदस्य उनके पास जाएगा.
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इस वचन के अनुसार, आज के दिन उसके बेटे को गरुड़ के पास जाना है. इसे वजह से वह डरी हुई है कि आज उसके बेटे के प्राणों पर संकट है. यह सोच-सोचकर वह काफी दुखी है. तब जीमूतवाहन ने कहा कि तुम परेशान न हो. तुम्हारे बेटे को कुछ नहीं होगा. तुम्होरे बेटे के बदले वह स्वयं पक्षीराज गरुड़ के पास जाएंगे. जीमूतवाहन उनका आहार बनने के लिए तैयार थे. उनकी बातों को सुनकर वह वृद्ध महिला शांत हुई और बेटे के बचने की खुशी उसके चेहरे पर दिखने लगी.
उस दिन पक्षीराज गरुड़ के पास नाग वंश के सदस्य के जाने का समय आया तो जीमूतवाहन स्वयं वहां पहुंच गए. जीमूतवाहन ने अपने शरीर को लाल रंग के कपड़े से लपेट रखा था. पक्षीराज गरुड़ आए और जीमूतवाहन को अपने मजबूत पंजों में जकड़ लिया और अपने साथ लेकर उड़ गए.
गरुड़ ने देखा कि जीमूतवाहन दर्द से चीख और रो रहे हैं. तब गरुड़ एक स्थान पर रुके तो जीमूतवाहन ने उनको सारी घटना बताई. जीमूतवाहन की दया और परोपकार की भावना से पक्षीराज गुरुड़ काफी प्रभावित हुए, उन्होंने जीमूतवाहन को जीवनदान दे दिया. जीमूतवाहन के प्राण बच गए.
गरुड़ ने जीमूतवाहन से कहा कि अब वे नाग वंश के किसी सदस्य को अपना आहार नहीं बनाएंगे. इस प्रकार से जीमूतवाहन ने नाग वंश की उस वृद्धि महिला के बेटे के प्राणों की रक्षा की और नाग वंश को भी गरुड़ के भय से मुक्त कर दिया. जो माताएं विधि विधान से व्रत रखकर यह कथा सुनती हैं, उनको पुण्य लाभ होता है और संतान सुरक्षित रहती है.
जीवित्पुत्रिका व्रत कथा
जितिया व्रत की एक दूसरी भी कथा है, जो अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा के गर्भ में पल रही संतान से जुड़ी है. पौराणिक कथा के अनुसार, महाभारत युद्ध में गुरु द्रोणाचार्य के मौत की खबर पाकर उनका पुत्र अश्वत्थामा क्रोध और बदले की आग में जलने लगता है. एक रात वह पांडवों के शिविर घुस जाता है.
पिता की मृत्यु का बदला लेने के लिए अश्वत्थामा उस शिविर में गहरी नींद में सो रहे 5 लोगों को मार डालता है. वो सोचता है कि उसने पांचों पांडवों को मार डाला, लेकिन वे सभी पांडवों की संतानें थीं. जब यह बात अश्वत्थामा को पता चलती है तो वह अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा के गर्भ में पल रहे शिशु को ब्रह्मास्त्र चलाकर मार देता है.
लेकिन भगवान कृष्ण ने उत्तरा की संतान की रक्षा करते हैं. उसे फिर से जीवित कर देते हैं. वह बच्चा गर्भ में मरकर फिर से जीवित हो जाता है, इसे वजह से उसका नाम जीवित्पुत्रिका पड़ता है. हालांकि बाद में वही बच्चा राजा परीक्षित के नाम से प्रसिद्ध होता है. इस घटना के बाद से ही माताएं अपनी संतान की रक्षा के लिए जीवित्पुत्रिका या जितिया व्रत करने लगीं.
जितिया मुहूर्त और पारण
आश्विन कृष्ण अष्टमी तिथि का प्रारंभ: 14 सितंबर, रविवार, 5:04 एएम पर
आश्विन कृष्ण अष्टमी तिथि का समापन: 15 सितंबर, सोमवार, 3:06 एएम पर
रवि योग: 6:05 ए एम से 8:41 ए एम
जितिया पूजा मुहूर्त: सुबह में 7:38 ए एम से दोपहर 12:16 पी एम,
शाम में पूजा का मुहूर्त 6:27 पी एम से 07:55 पी एम तक
जितिया पारण समय: 15 सितंबर, सोमवार, 06:06 ए एम के बाद

