KANPUR HISTORY NEWS : यह बंकर फूलबाग स्थित राष्ट्रीय नागरिक सुरक्षा के कार्यालय में बना है। 1962 में चीन और 1965 व 1971 में पाकिस्तान से युद्ध के दौरान शहर की सुरक्षा एक बंकर से की गई थी। KANPUR NEWS
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इस बंकर में तत्कालीन जिलाधिकारी बैठकर अन्य जरूरी 12 विभागों के अधिकारियों के साथ रणनीति बनाते थे और पूरे शहर को अलर्ट करने के साथ सुरक्षा पर नजर रखते थे। हालांकि दशकों से इसका उपयोग न होने से अन्य उपकरणों की स्थिति दयनीय हो गई है। KANPUR MOCK DRILL NEWS
राउंड टेबल पर बैठकर बनती थी रणनीति
बंकर में लगी राउंड टेबल पर बैठकर युद्ध के समय शहर की सुरक्षा समेत अन्य जरूरी बिंदुओं पर रणनीति तैयार की जाती थी। इसमें प्रशासन व पुलिस के अलावा फायर, रेस्क्यू पार्टी, फर्स्टएड पार्टी, मोबाइल फर्स्टएड पोस्ट्स, एंबुलेंस, मोबाइल सर्जिकल यूनिट्स, सीडी सर्विसेस, एसेंसियल सर्विस, बम डिस्पोजल स्क्वॉड समेत अन्य जरूरी सर्विस के प्रतिनिधि मौजूद रहते थे।
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इस सायरन ने 65 व 71 की लड़ाई में किया था अलर्ट
बंकर में करीब 25 हैंडहेल्ड सायरन रखे हैं। ये वही सायरन है, जिन्होंने 1965 व 1971 की पाकिस्तान के खिलाफ लड़ाई में शहर को अलर्ट करता था। इस सायरन की आवाज के साथ ही शहर को ब्लैकआउट किया जाता था। इस सायरन से अलग-अलग आवाज निकलती थी, जिसका अर्थ भी अलग-अलग होता था।
एक बटन से बजते थे शहरभर के 35 सायरन
बंकर में एस सेमुअलटेनिस ब्रॉडकास्ट सिस्टम बना हुआ है। जिसमें एक बजट लगा है, जिसकी मदद से शहर के अलग-अलग इलाकों में लगे 35 सायरन एक साथ बजते थे। जिससे अलर्ट करना आसान होता था। इसका इस्तेमाल 1971 के युद्ध में हुआ है।
हॉट लाइन से मिलता था खतरे का संदेश
बंकर में फोन लाइन का एक हॉट लाइन सिस्टम (नॉन एक्सचेंज लाइन) भी लगा है। जिसके माध्यम से खतरे का संदेश सीधे एयरफोर्स के माध्यम से मिलता है। जिसके बाद सिविल डिफेंस या अन्य जरूरी विभाग अलर्ट होकर जनता को जागरूक करते हैं। हालांकि यह सिस्टम वर्तमान तकनीक के हिसाब से पुराना हो चुका है।
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