KANPUR NEWS : कानपुर ऑफ्थैल्मिक सोसाइटी की ओर से शनिवार को दो दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया। इस सेमिनार में देशभर से आए प्रमुख नेत्र विशेषज्ञों ने भाग लिया और आंखों के उपचार, नई तकनीकों तथा जागरूकता पर विस्तृत चर्चा की।
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डॉ. रामामूर्ति ने लोगों को चेतावनी दी कि मेडिकल स्टोर से दवा लेकर आंखों में कभी न डालें। उन्होंने कहा कि छोटे गांवों तक अब सुविधाएं पहुंच गई हैं और हर जगह नंबर जांच की व्यवस्था है, लेकिन लालच में आकर गलत जांच और उपचार न कराएं। बच्चों को स्वस्थ आंखों के लिए प्रतिदिन 2–3 घंटे बाहर खेलने के लिए प्रेरित करे।
आंखों के इलाज में भारत टॉप पर
डॉ. मनीष महेंद्रा ने मोतियाबिंद के आधुनिक उपचारों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अब ऐसे लेंस उपलब्ध हैं, जिनसे मरीजों की दृष्टि बेहतर होती है और ऑपरेशन के बाद कोई विशेष परेशानी नहीं आती।
भारत में विश्वस्तरीय नेत्र शल्यक्रियाएं हो रही हैं और 18 से 40 वर्ष की आयु में किए गए ऑपरेशन अत्यंत लाभकारी होते हैं। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि स्कूल खुलते ही बच्चों की आंखों की जांच अनिवार्य होनी चाहिए क्योंकि धूप की कमी और ऑनलाइन क्लासेज बच्चों की आंखों के लिए हानिकारक हैं।
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि स्टेरॉयड का प्रयोग आंखों के लिए अत्यंत खतरनाक है और एक बार रोशनी चली गई तो उसे वापस पाना मुश्किल है। सभी विशेषज्ञों ने मिलकर इस बात पर जोर दिया कि समय पर जांच, सही खानपान और जागरूकता ही आंखों को स्वस्थ बनाए रखने का सबसे सुरक्षित उपाय है।
इस कार्यक्रम में डॉ. शरद बाजपेई, डॉ. शालिनी मोहन, डॉ. पारुल सिंह, डॉ. एएम जैन, डॉ. संगीता शुक्ला, डॉ. आकांक्षा, डॉ. आकाश, डॉ. उमा अग्रवाल, डॉ. आरसी गुप्ता, डॉ. रुचिका अग्रवाल, डॉ. अंशुमान अग्रवाल मौजूद रहे।

