Maintaining hormonal balance : हॉर्मोनल असंतुलन (hormonal balance) से अनियमित मासिक धर्म चक्र, मूड में उतार-चढ़ाव और अन्य चिंताएं हो सकती हैं. आयुर्वेद, चिकित्सा की प्राचीन प्रणाली, कई जड़ी-बूटियां प्रदान करती है, जो हॉर्मोनल संतुलन का समर्थन कर सकती हैं. Maintaining hormonal balance
तो चलिए आपको बताते हैं उनके नाम और बनाने का तरीका.
कैसे बनाएं चूर्ण
आपको अलसी, पंपकिन और शौंफ के बीजों को अच्छे से रोस्ट करना है, फिर उन्हें मिक्सी में पीस लेना है और एक जार में स्टोर करके रख लेना है. अब आप हर दिन इसको 1 चम्मच खा लीजिए. ऐसा आप 1 महीने तक ऐसा करते हैं, तो आपके असुंतिलत हार्मोन में सुधार आ सकता है.
यह आपकी स्किन के लिए भी अच्छी है. यह आपके बालों को भी हेल्दी रखता है. इसके अलावा यह आपके पेट के लिए भी बहुत अच्छा माना जाता है.
कैसे करें हॉर्मोन बैलेंस
बालासन (balasan) भी कर सकती हैं. यह भी आपको फिट रखने के लिए बेस्ट है. यह आसन करने से आपका दिमाग शांत होगा और आपके शरीर को आराम मिलेगा. यह आसन पीठ और गर्दन की अच्छी स्ट्रेचिंग करती है. वहीं सेतुबंधासन को करने से ब्रेस्ट, गर्दन और रीढ़ की हड्डी की अच्छी स्ट्रेचिंग होती है. इससे आप स्ट्रेस फ्री होते हैं.
ट्राईएंगल आसन को करने से पूरे दिन की थकावट दूर होती है और दिन भर ऊर्जावान रहते हैं. यह ट्राईएंगल आसन शरीर की एक अच्छी स्ट्रेचिंग कर देता है. इसको करने से गर्दन, पीठ, कमर का दर्द नहीं होता है. इससे शरीर का बैलेंस करने की भी कला विकसित होती है.
इस आसन को करने से पीठ का दर्द कम होता है और पेट मजबूत बनता है. इससे मेटाबॉलिज्म बूस्ट होता है. इससे अपच, गैस, मितली की परेशानी दूर होती है. इससे लोअर बॉडी मजबूत होती है. तो इसको भी अपनी दिनचर्या का हिस्सा जरूर बनाएं.
अधोमुख श्वानासन पैर की नसों, कूल्हों की मांसपेशियों और हाथों में खिंचाव लाने के लिए बहुत ही कारगर आसन है. इस आसन के अभ्यास से कूल्हों में फ्लेक्सिबिलिटी आती है. कूल्हों के साथ ही पीठ के दर्द में भी इस आसन से राहत महसूस होती है.

