Stray dogs Supreme Court hearing: सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के मुद्दे पर गुरुवार को सुनवाई की। जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की स्पेशल बेंच ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है। Stray dogs Supreme Court hearing
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सुप्रीम कोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित
सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच ने फैसला सुरक्षित रख लिया. यह फैसला राजनेताओं, कार्यकर्ताओं और नागरिकों द्वारा मानवीय, वैज्ञानिक समाधानों की मांग के भारी विरोध के बाद आया है.
चिकन खाकर पशु प्रेमी बनते हैं
आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर सुप्रीम कोर्ट में 14 अगस्त 2025 को जोरदार बहस हुई. सरकार का पक्ष रखते हुए सॉलिसिटर जनरल दुष्यंत दवे ने कहा कि कुछ लोग चिकन, अंडे आदि खाते हुए दिखते हैं और फिर पशु प्रेमी होने का दावा करते हैं. यह एक ऐसा मुद्दा है जिसका समाधान होना चाहिए. बच्चे रैबीज से मर रहे है. नसबंदी करने से रेबीज को नहीं रोका जा सकता. कोई पशु से नफरत करने वाला नहीं है. सैकड़ों जीवों में केवल चार ही जहरीले हैं. हम उन्हें घर में नहीं रखते हैं. कुत्तों को मारा नहीं जाएगा, उन्हें सिर्फ अलग किया जाएगा.
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मेरी गुजारिश है कि स्टे लगा दिया जाए: कपिल सिब्बल
कुत्तों के हक में आवाज उठाते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा- पहली बार मैंने एसजी को यह कहते हुए सुना कि कानून है, लेकिन इसे पालन करने की जरूरत नहीं है. उन्होंने पूछा कि क्या कुत्तों का बधियाकरण किया गया है. क्या पैसा दिया गया है? कोई शेल्टर नहीं है. ऐसा आदेश स्वत: संज्ञान लेकर दिया गया. कोई नोटिस नहीं. वे कुत्तों को उठा रहे हैं, वे कहां जाएंगे. आदेश में कहा गया है कि उन्हें छोड़ना नहीं है. यह बहुत गंभीर स्थिति है. इस पर गहराई से बहस होनी चाहिए. मेरी गुजारिश है कि इस पर स्टे लगा दिया जाए.
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शेल्टर होम ही नहीं है
सिब्बल ने कहा कि कल शाम को आदेश SC की वेबसाइट पर आया है, और प्रशासन ने आदेश आने से पहले ही कुत्तों को सड़कों से उठाना शुरू कर दिया इन्हें मार दिया जाएगा.
सिब्बल के साथ साथ अभिषेक मनु सिंघवी ने SC के पिछले आदेश में जारी दिशानिर्देश पर रोक की मांग की. सिंघवी ने कहा कि अगर शेल्टर होम होते तो भी इस आदेश पर अमल में दिक्कत नहीं होती. शेल्टर होम ही नहीं है.
जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा- अधिकारी वह नहीं कर रहे, जो उन्हें करना चाहिए
जस्टिस विक्रम नाथ ने एक महिला वकील से पूछा- मिस दवे, आप किसकी तरफ से हैं? दवे बोलीं- मैं एमसीडी की ओर से हूं। हमारा हलफनामा रिकॉर्ड में है। जो भी आदेश पारित होगा, हम उसका पालन करने तैयार हैं।
जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा कि लेकिन आपका क्या कहना है? यह नगर निगम की निष्क्रियता के कारण हो रहा है। स्थानीय अधिकारी वह नहीं कर रहे, जो उन्हें करना चाहिए। उन्हें यहां जिम्मेदारी लेनी चाहिए। यहां हस्तक्षेप दर्ज कराने आए हर व्यक्ति को जिम्मेदारी लेनी चाहिए।

