Supreme Court Big News : सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) के उस फैसले को पलट दिया, जिसमें कहा गया था कि किसी लड़की के पायजामे का नाड़ा तोड़ना और स्तनों को पकड़ना रेप के प्रयास के आरोप के लिए पर्याप्त नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा- इस तरह की हरकत रेप का प्रयास मानी जाएंगी।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 17 मार्च, 2025 को दिए आदेश में कहा था कि ये कृत्य रेप या रेप के प्रयास की श्रेणी में नहीं आते, इसके बाद ‘अटेम्प्ट टु रेप’ का आरोप हटाने का निर्देश दिया।
Supreme Court CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने बुधवार को यह फैसला सुनाया। मामला उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले से जुड़ा है। साल 2022 में महिला ने शिकायत दर्ज कराई थी कि गांव के तीन युवकों ने उसकी नाबालिग बेटी को घर छोड़ने के बहाने रोका और उसके साथ गलत हरकत की। आरोपियों ने बच्ची के निजी अंगों को पकड़ा और पायजामे की डोरी तोड़ दी।
पीड़िता की मां की शिकायत पर तीनों आरोपियों के खिलाफ POCSO एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया। कासगंज की विशेष POCSO अदालत ने 2023 में आरोपियों को समन जारी किया था। इसके बाद आरोपियों ने मामले को हाईकोर्ट में चुनौती दी।
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HC फैसले पर कानूनी विशेषज्ञों ने व्यक्त की थी नाराजगी
गौरतलब है कि कानूनी विशेषज्ञों ने बलात्कार के आरोप की परिभाषा पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय की टिप्पणी की निंदा की थी और न्यायाधीशों से संयम बरतने को कहा था। विशेषज्ञों ने कहा था कि ऐसे बयानों के कारण न्यायपालिका में लोगों के विश्वास में कमी आती है। उच्च न्यायालय ने 17 मार्च को फैसला सुनाया था कि केवल स्तन पकड़ना और ‘पजामा’ का नाड़ा तोड़ना बलात्कार का अपराध नहीं है, ऐसा अपराध किसी महिला के खिलाफ हमला या आपराधिक बल के इस्तेमाल के दायरे में आता है, जिसका उद्देश्य उसे निर्वस्त्र करना या नग्न होने के लिए मजबूर करना है।
इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती
यह आदेश न्यायमूर्ति राम मनोहर नारायण मिश्रा ने उन दो व्यक्तियों की एक समीक्षा याचिका पर पारित किया था, जिन्होंने कासगंज के एक विशेष न्यायाधीश के आदेश को चुनौती देते हुए अदालत का रुख किया। विशेष न्यायाधीश ने याचिकाकर्ताओं को अन्य धाराओं के अलावा भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 376 के तहत तलब किया था। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार एंव अन्या को नोटिस जारी कर दिया था।
इलाहाबाद हाई कोर्ट का ये फैसला
दरअसल, दुष्कर्म के एक मामले में उच्च न्यायालय ने सुनवाई के बाद अपने आदेश में कहा था कि लड़की के स्तनों को पकड़ना, उसके पायजामे की डोरी तोड़ना और उसे पुलिया के नीचे खींचने की कोशिश करना बलात्कार के प्रयास के आरोप लगाने के लिए पर्याप्त नहीं है, क्योंकि ये केवल ‘‘तैयारी” का मामला है। ये अपराध करने के वास्तविक प्रयास से अलग है।

