KANPUR IGRS RANK NEWS : आईजीआरएस रैंक में जिला फिर एक अंक नीचे चला गया। महीने भर मीटिंगों का दौर, वीडियो कांफ्रेंसिंग से कर्मचारियों को फटकार, यहां तक कि पांच आलाधिकारियों के खिलाफ शासन में कार्यवाही की संस्तुति तक कर दी गई, लेकिन मामला सिफर ही रहा।
इस दफा 75 जिलों में रैंक 71वीं पहुंच गई। यह स्थिति तब है जब प्रशासन के आलाधिकारी समेत कई अफसर सिर्फ जनता के शिकायतों के निस्तारण में लगे हैं ।
रैंक दो पायदान फिर खिसकी, प्रदेश के 75 जिलों में कानपुर को 70वीं रैंक
डीएम महेंद्र सिंह तंवर ने बताया कि शिकायत निस्तारण में हीलाहवाली बर्दाश्त नहीं, निगेटिव फीडबैक वाले विभागों को नोटिस जारी कर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
75 जिलों में 68वीं रैंक, सात अंक गिरी
अधिकारी अपनी कार्यशैली में सुधार नहीं कर रहे हैं। जिससे शिकायतों का हकीकत में निस्तारण नहीं हो रहा है। पिछले महीने की 70वीं की अपेक्षा इस बार रैंक 71वीं हो गई। 80 प्रतिशत और 140 में 112 अंक है। पिछले महीने 140 में 113 अंक, प्रतिशत 80.71 थे। प्रशासन के करोडो प्रयास के बाद भी IGRS रैंक में सुधार नहीं हो पा रहा। रैंक गिरने का कारण दफ्तर बैठे शिकायतों के निस्तारण और उसके बाद फीडबैक निगेटिव बताया जा रहा। डीएम के कई प्रयास के बाद भी अफसरों और कर्मचारियों की लंबी फौज भी आईजीआरएस की रैंकिंग को संभालने में नाकामयाब साबित हो रही ।
बीते महीने शासन को पांच आलाधिकारियों के खिलाफ लिखा था लेटर (Kanpur news)
सीएमओ समेत पांच आलाधिकारियों के खिलाफ शासन को लेटर
लगातार गिर रही रैंकिंग के मद्देनजर सितंबर में प्रशासन ने पांच आलाधिकारियों के खिलाफ शासन में कार्यवाही की संस्तुति की थी। शिकायत निस्तारित हुई कि नहीं इस संबंध में जानकारी करने में निगेटिव फीडबैक में जिले का प्रतिशत गिरता जा रहा। अप्रैल, मई, जून और जुलाई के आंकडों के अनुसार जिन विभागों के अधिक फीडबैक निगेटिव आए, उनपर सख्त कार्रवाई की गई। सीएमओ हरिदत्त नेमी, अधिशासी अभियन्ता जल निगम ग्रामीण मुकेश चक, बीएसए हरिओम सिंह, कृषि उपनिदेशक आरएस वर्मा, अधिशासी अभियन्ता दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लि राजकुमार सिंह के खिलाफ शासन में कार्यवाही की संस्तुति का पत्र लिखा गया।
कुछ ढीठ अफसरों से बिगड रहीं रैंक (KANPUR NEWS)
आईजीआरएस की रैंक को लेकर प्रशासन के आलाधिकारी संबंधित विभागों पर कडा एक्शन नहीं ले रहे जिसके चलते निगेटिव फीडबैक और ऑन टेबल ही शिकायतों का निस्तारण किया जा रहा। विभागों को नोटिस तो तामील हो रही, लेकिन कई अफसर इसका जवाब तक नहीं दे रहे। नीचे स्तर पर क्या कार्रवाई की जा रही, यह सब भी केवल खानापूर्ति है।

