KANPUR IGRS RANK NEWS : आईजीआरएस रैंक में जिला फिर दो अंक नीचे चला गया। महीने भर मीटिंगों का दौर, वीडियो कांफ्रेंसिंग में कर्मचारियों को फटकार, लेकिन रिजल्ट जीरो ही मिल रहा।
सीएमओ समेत पांच आलाधिकारियों के खिलाफ शासन को लेटर
बीते महीने से प्रतिशत में कुछ अंकों का इजाफा जरूर है पर उससे रैंक में सुधार नहीं हो सका। 75 जिलों में रैंक 70वीं पहुंच गई है। एडीएम सिटी आलोक कुमार गुप्ता ने बताया कि जिन विभागों से रैंक खराब हो रही है, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
पिछले महीने की 68वीं की अपेक्षा इस बार रैंक 70वीं हो गई है। प्रतिशत 80.71 और अंक 140 में 113 है। पिछले महीने 140 में 109 अंक के साथ् प्रतिशत 77.86 थे। इस बार अंकों और प्रतिशत में इजाफा हुआ है, लेकिन रैंक दो पायदान नीचे चली गई।
75 जिलों में 68वीं रैंक, सात अंक गिरी
प्रशासन के करोडो प्रयास के बाद भी IGRS रैंक में सुधार नहीं हो पा रहा है। रैंक गिरने का कारण दफ्तर बैठे शिकायतों के निस्तारण और उसके बाद फीडबैक निगेटिव बताया जा रहा है। डीएम के कई प्रयास के बाद भी अफसरों और कर्मचारियों की लंबी फौज भी आईजीआरएस की रैंकिंग को संभालने में नाकामयाब साबित हो रही । IGRS रैंकिंग में जिले का प्रदर्शन काफी निराशाजनक है। इस संबंध में प्रशासन के ओर से कई आलाधिकारियों के खिलाफ शासन को कार्रवाई की संस्तुति का लेटर भेजा गया है।
प्रशासन ने पांच आलाधिकारियों के खिलाफ शासन में कार्यवाही की संस्तुति की है। कई विभागों के अफसरों की ढिठई से शिकायतों के निस्तारण ऑन टेबल ही कर दिया जा रहा है। वहीं शिकायत निस्तारित हुई कि नहीं इस संबंध में जानकारी करने में निगेटिव फीडबैक में जिले का प्रतिशत गिर रहा है। अप्रैल, मई, जून और जुलाई के आंकडों के अनुसार जिन विभागों के अधिक फीडबैक निगेटिव आए हैं अब उनपर सख्त कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। सीएमओ हरिदत्त नेमी, अधिशासी अभियन्ता जल निगम ग्रामीण मुकेश चक, बीएसए हरिओम सिंह, कृषि उपनिदेशक आरएस वर्मा, अधिशासी अभियन्ता दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लि. राजकुमार सिंह के खिलाफ शासन में कार्यवाही की संस्तुति का पत्र लिखा गया है।
कुछ ढीठ अफसरों से बिगड रहीं रैंक (KANPUR NEWS)
आईजीआरएस की रैंक को लेकर प्रशासन के आलाधिकारी संबंधित विभागों पर कडा एक्शन नहीं ले रहे जिसके चलते निगेटिव फीडबैक और ऑन टेबल ही शिकायतों का निस्तारण किया जा रहा। विभागों को नोटिस तो तामील हो रही, लेकिन कई अफसर इसका जवाब तक नहीं दे रहे। नीचे स्तर पर क्या कार्रवाई की जा रही, यह सब भी केवल खानापूर्ति है।

