Dev Uthani Ekadashi 2025 : देवउठनी एकादशी (Dev Uthani Ekadashi) के दिन भगवान विष्णु पूरे 4 महीने बाद अपनी योग निंद्रा से जागते हैं। इसलिए इस तिथि के बाद से ही विवाह आदि जैसे मांगलिक कार्य भी शुरू हो जाते हैं। Dev Uthani Ekadashi 2025
देवउठनी एकादशी के एक दिन बाद यानी द्वादशी तिथि पर तुलसी विवाह किया जाता है। ऐसे में चलिए जानते हैं इसके पीछे की पौराणिक कथा। Dev Uthani Ekadashi 2025
पतिव्रता नारी थी राक्षस की पत्नी
पौराणिक कथा के अनुसार जालंधर नाम था जिसकी पत्नी वृंदा एक पतिव्रता नारी और भगवान की परम भक्त थी। जालंधर ने आतंक मचाया हुआ था जिससे सभी देवतागण परेशान थे। उस राक्षस के अत्याचारों से मुक्ति पाने के लिए सभी देव भगवान विष्णु के पास पहुंचे और उन्हें सारी बात बतलाई। Prabodhini Ekadashi 2025
तब यह हल निकला की वृंदा के सतीत्व को ही नष्ट करके ही जालंधर को हराया जा सकता है। इसके लिए भगवान विष्णु ने जालंधर का रूप धारण किया। वृंदा ने उन्हें अपना पति समझकर स्पर्श कर लिया, जिस कारण वृंदा का पतिव्रत धर्म टूट गया। इसके चलते जालंधर की सभी शक्तियां नष्ट हो गई और शिव जी ने युद्ध के दौरान उसका सिर धड़ से अलग कर दिया। Dev Uthani Ekadashi 2025
विष्णु जी को दिया श्राप
जब वृंदा को पता चला कि उसके साथ छल किया गया है, तो वह क्रोध से भर गई, जिसके चलते उसने भगवान विष्णु को श्राप दे दिया। वृंदा द्वारा श्री हरि को पत्थर बनने का श्राप दिया गया, जिसे भगवान विष्णु ने स्वीकार कर लिया और वे एक पत्थर के रूप में हो गए। यह देखकर मां लक्ष्मी बहुत दुखी हुईं और उन्होंने वृंदा से प्रार्थना की, कि वह अपना श्राप वापस ले ले।
भगवान विष्णु ने कही ये बात
क्रोध शांत होने के बाद वृंदा ने भगवान विष्णु को तो श्राप से मुक्त कर दिया, लेकिन वृंदा ने खुद आत्मदाह कर लिया। जहां वृंदा भस्म हुई उस स्थान पर एक पौधा उग गया। इस पौधे को भगवान विष्णु जी ने तुलसी नाम दिया। भगवान विष्णु ने यह भी कहा कि शालिग्राम अर्थात उनके स्वरूप को तुलसी के साथ ही पूजा जाएगा। इसलिए प्रत्येक वर्ष देवउठनी एकादशी पर विष्णु जी के स्वरूप शालिग्राम एवं तुलसी का विवाह करने की परम्परा चली आ रही है।
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