GSVM Medical College News: जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज (GSVM Medical College) के जच्चा-बच्चा अस्पताल (हैलट) में डिलीवरी के लिए आने वाली गरीब और जरूरतमंद महिलाओं के लिए एक बेहद राहत भरी खबर है। GSVM Medical College News
अब नवजात बच्चे को गोद में लेकर मां को सरकारी मदद पाने के लिए बैंक के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। गुरुवार शाम 4 बजे भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने अस्पताल के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग के साथ मिलकर एक अनोखी पहल शुरू की है, जिसे ‘बेडसाइड बैंक खाता’ नाम दिया गया है।
इसके तहत अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान ही महिलाओं के बेड पर जाकर उनका बैंक खाता खोल दिया जाएगा, ताकि जननी सुरक्षा योजना (JSY) की प्रोत्साहन राशि सीधे और बिना किसी देरी के उनके खाते में पहुंच सके।
स्टाफ को सरकारी बैंकिंग स्कीमों का पता ही नहीं
इस नई सुविधा की शुरुआत के साथ ही अस्पताल के प्रसूति विभाग में करीब 400 कर्मचारियों के बीच वित्तीय साक्षरता को लेकर एक चौंकाने वाला सर्वे भी किया गया। इस सर्वे की रिपोर्ट ने सबको हैरान कर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, अस्पताल के 95 फीसदी कर्मचारियों को बैंकों के माध्यम से चलने वाली सरकारी कल्याणकारी और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की पर्याप्त जानकारी ही नहीं है।
इतना ही नहीं, हर दिन सैकड़ों मरीजों की देखभाल करने वाले इस स्टाफ में से लगभग 10 प्रतिशत कर्मचारी कभी न कभी किसी न किसी तरह की ऑनलाइन या साइबर वित्तीय धोखाधड़ी (साइबर ठगी) का शिकार भी हो चुके हैं।
ठगी हो जाए तो क्या करें?
सर्वे में एक और चिंताजनक बात सामने आई कि अस्पताल के करीब 90 प्रतिशत कर्मचारियों को यह मालूम ही नहीं है कि अगर उनके साथ कोई साइबर फ्रॉड या ऑनलाइन ठगी हो जाए, तो तुरंत क्या कदम उठाने चाहिए। उन्हें नहीं पता कि शिकायत कहां और कैसे दर्ज करानी है, जिससे उनके नुकसान को कम किया जा सके।
इसी अज्ञानता को दूर करने और स्टाफ सहित मरीजों के परिजनों को जागरूक करने के लिए अस्पताल में ‘वित्तीय साक्षरता और वित्तीय समावेशन’ पर एक खास सेमिनार भी रखा गया। इसमें डिजिटल बैंकिंग, यूपीआई, एटीएम और मोबाइल बैंकिंग के सुरक्षित इस्तेमाल के तरीके सिखाए गए।
खत्म होगी बिचौलियों की टेंशन
अस्पताल प्रशासन और डॉक्टरों के मुताबिक, जच्चा-बच्चा वार्ड में ही बेड पर खाता खुलने की इस सुविधा से वित्तीय पारदर्शिता बढ़ेगी। आम तौर पर गरीब परिवारों की महिलाओं का बैंक खाता न होने या उसकी प्रक्रिया जटिल होने के कारण सरकारी मदद का पैसा मिलने में महीनों लग जाते थे।
अब एसबीआई की मेडिकल कॉलेज शाखा की टीम सीधे वार्ड में जाकर कागजी कार्रवाई पूरी करेगी। इससे डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए योजना का लाभ समय पर सीधे लाभार्थियों तक पहुंचेगा और बिचौलियों या भागदौड़ की टेंशन पूरी तरह खत्म हो जाएगी।

