KANPUR CSJMU NEWS: युवाओं को संदेश देते हुए राज्यपाल ने कहा, “जिस प्रकार हम कपड़ों को निचोड़कर पानी अलग करते हैं, ठीक उसी तरह समाज में जहाँ भी आप जाएँ, अपने ज्ञान को देश सेवा में पूरी तरह निचोड़ दें।” उन्होंने पढ़ाई के साथ कोई न कोई हुनर व कला अवश्य सीखने पर जोर दिया जो युवाओं को आत्मनिर्भर बनाए।
छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर का 41वां दीक्षांत समारोह गुरुवार, 9 जुलाई को वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई प्रेक्षागृह में बेहद भव्यता और हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। KANPUR CSJMU NEWS
नैक (NAAC) द्वारा A++ ग्रेड प्राप्त और क्यूएस एशियन यूनिवर्सिटी रैंकिंग्स में विशिष्ट स्थान रखने वाले सीएसजेएमयू का दीक्षांत समारोह इस बार डिजिटल नवाचार, वीरांगनाओं-बेटियों की सफलता और आत्मनिर्भर भारत की नई सोच का गवाह बना।
दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता कुलाधिपति एवं उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने की। मुख्य अतिथि के रूप में अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) के चेयरमैन एवं दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. योगेश सिंह उपस्थित रहे।
विशिष्ट अतिथियों में उत्तर प्रदेश सरकार के उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय और उच्च शिक्षा राज्य मंत्री रजनी तिवारी शामिल हुए। सभी अतिथियों का स्वागत कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक और प्रति कुलपति प्रो. सुधीर कुमार अवस्थी ने किया।
कुलाधिपति व राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का अध्यक्षीय उद्बोधन-
दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने विश्वविद्यालय की अभूतपूर्व उपलब्धियों पर गर्व व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि पिछले 5 वर्षों में कैंपस में छात्रों की संख्या में 131.7% की शानदार वृद्धि दर्ज की गई है। इसके साथ ही, एनआईआरएफ, क्यूएस एशिया रैंकिंग और ग्लोबल सस्टेनेबिलिटी इंडेक्स में मिली राष्ट्रीय व वैश्विक पहचान संस्थान के दृढ़ संकल्प और शैक्षणिक उत्कृष्टता को प्रमाणित करती है।
उन्होंने डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में विश्वविद्यालय के प्रयासों को सराहते हुए कहा कि एडमिनिस्ट्रेशन, रिसर्च और एकेडमिक्स में एआई समावेश तथा ‘सस्टेनेबिलिटी डैशबोर्ड’ (STARS) की शुरुआत पर्यावरण व आधुनिकता के प्रति हमारी जिम्मेदारी को दर्शाती है। राज्यपाल ने सभी छात्रों से डिग्रियों के ऑनलाइन डिज़िलॉकर अपलोड का शत-प्रतिशत लाभ उठाने और उन्हें अनिवार्य रूप से डाउनलोड करने की अपेक्षा की।
संस्थान के सामाजिक सरोकारों को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि संगीत, योग, खेल व मोरल वैल्यूज जैसी समग्र शिक्षा को अनिवार्य करना और अवसाद से जूझ रहे युवाओं के लिए क्लीनिकल साइकोलॉजी काउंसलिंग की व्यवस्था एक क्रांतिकारी कदम है।
देश की रक्षा में तैनात अग्निवीरों को उनकी सुविधानुसार गुरमुखी लिपि व अन्य माध्यमों में ट्रेनिंग देने तथा उनके आश्रितों को शुल्क में छूट देने के फैसले को उन्होंने उच्च सामाजिक दृष्टिकोण का उदाहरण बताया। इसके अतिरिक्त, महिला अध्ययन केंद्र द्वारा गोद ली गई आंगनवाड़ियों में बच्चों के नामांकन में 23% की वृद्धि और अभिभावकों की शत-प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित होने को जमीनी स्तर पर देश के विकास की मजबूत नींव करार दिया।
संस्कार और माता-पिता की सेवा का पाठ पढ़ाते हुए राज्यपाल ने भावुक अपील की कि जीवन में चाहे आईएएस जैसे किसी भी ऊंचे पद पर पहुँचें, अपने पारिवारिक मूल्यों को कभी न भूलें। उन्होंने विशेष रूप से बेटियों से अनुरोध किया कि वे शादी या पारिवारिक दायित्वों के बाद अपने करियर और पढ़ाई को सीमित न करें, बल्कि समाज व माता-पिता के त्याग से मिले इस ज्ञान का लाभ राष्ट्र कल्याण में अवश्य दें।
51 मेधावी छात्र-छात्राओं को पदक मिले
इस वर्ष के दीक्षांत समारोह में बेटियों की मेधा का एक बार फिर बोलबाला रहा। विश्वविद्यालय द्वारा कुल 96 पदक प्रदान किए गए, जिनमें से कुल 51 मेधावी छात्र-छात्राओं को पदक मिले। इन 51 विद्यार्थियों में 42 छात्राएं और केवल 9 छात्र शामिल रहे। पदक प्राप्त करने में बेटियों का प्रतिशत 82.35% रहा, जिसे देखकर प्रेक्षागृह तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। राज्यपाल ने स्वयं 25 मुख्य मेधावियों को मंच पर मेडल पहनाकर सम्मानित किया। इसके अतिरिक्त कुल 92 शोधार्थियों को पी-एच.डी. की उपाधि दी गई, जिनमें 50 महिला और 42 पुरुष विद्यार्थी शामिल रहे।
उपलब्धियों की विस्तृत जानकारी सबके सामने रखा
दीक्षांत समारोह के आधिकारिक शुभारंभ पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने विश्वविद्यालय की प्रगति आख्या (वार्षिक प्रगति रिपोर्ट) प्रस्तुत की। अपने प्रस्तुति में कुलपति ने बीते वर्ष में विश्वविद्यालय द्वारा शैक्षणिक, अनुसंधान, तकनीकी और ढांचागत क्षेत्रों में हासिल की गई युगांतरकारी उपलब्धियों की विस्तृत जानकारी सबके सामने रखा।
प्रगति आख्या के प्रस्तुतिकरण के बाद परम्परागत कच्छ चर्म शिल्प के विशिष्ट शिल्पाचार्य, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षणकर्ता एवं उद्यमी अंचल पी. बिजलानी को कुलाधिपति व राज्यपाल आनंदीबेन पटेल द्वारा डॉक्टर ऑफ लेटर्स (डी.लिट्.) की मानद उपाधि से विभूषित किया गया।
कुलाधिपति द्वारा शैक्षणिक सत्र 2025-26 हेतु विश्वविद्यालय की उपाधि पंजिका पर डिजिटल हस्ताक्षर कर विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं की उपाधियां, अंकतालिकाएँ डिजीलॉकर पर ऑनलाइन माध्यम (बटन दबाकर) द्वारा अपलोड किया गया।
मीडिया प्रभारी डॉ दिवाकर अवस्थी ने बताया कि इस बार के दीक्षांत में छात्राओं ने मेडल से पीएचडी की डिग्री तक हर क्षेत्र में निर्णायक बढ़त हासिल की है। विवि परिसर से लेकर सम्बद्ध महाविद्यालयों तक हर श्रेणी में छात्राएं आगे हैं।
विश्वविद्यालय के 41वें दीक्षांत समारोह में इस बार कुल 1,07,713 विद्यार्थियों को डिग्रियाँ दी गई, जिनमें 57,348 छात्राएँ (53.24%) और 50,365 छात्र (46.75 %) शामिल हैं। परिसर स्तर पर भी 3208 विद्यार्थियों में से 1609 छात्राएँ (50.15%) और 1599 छात्र (49.84%) हैं।
संबद्ध महाविद्यालयों से पास आउट हुए 104413 छात्रों में से 55689 (53.34%) छात्रायें और 48724 (46.67%) छात्र हैं। आँकड़े साफ दर्शाते हैं कि सीएसजेएमयू में महिलाओं की भागीदारी अब शिक्षा का नया चेहरा गढ़ रही है। 41वें दीक्षांत समारोह के अंतर्गत 51 छात्र-छात्राओं को 96 पदक दिये गए। जिसमें से 42 (82.35%) छात्राओं को तथा 9 (17.65%) छात्रों को पदक दिये गए।
30 छात्र-छात्राओं को 33 कुलाधिपति पदक दिये गए, जिसमें 26 (86.66%) छात्राओं को व 4 (13.33%) छात्रों को, जबकि 11 छात्र-छात्राओं को कुलपति पदक दिये गए, जिसमें से 10 (90.90%) छात्राओं को व 1 (9.10%) छात्र को दिया गया। 33 छात्र-छात्राओं को 52 प्रायोजित पदक दिये गए, जिसमें से 28 (84.85%) छात्राओं को व 5 छात्रों को (15.15%) पदक दिये गए। वहीं 92 छात्र-छात्राओं को पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई जिसमें से 42 छात्र तथा 50 छात्रायें हैं। अंत में दीक्षांत समारोह का समापन राष्ट्रगान के साथ किया गया।

