Kailash Mansarovar Yatra 2025: कैलाश मानसरोवर यात्रा में भाग लेने वाले 36 तीर्थयात्रियों का पहला जत्था आज सुबह सिक्किम में नाथुला सीमा के माध्यम से चीन के तिब्बती स्वायत्त क्षेत्र (TAR) में प्रवेश कर गया. Kailash Mansarovar Yatra 2025
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21 से 70 वर्ष की आयु के तीर्थयात्रियों के पहले जत्थे को दो भारत तिब्बत सीमा पुलिस कर्मियों द्वारा संपर्क अधिकारी के रूप में चीनी क्षेत्र की ओर ले जाया जा रहा है. नाथुला में राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर ने तीर्थयात्रा को हरी झंडी दिखाई. उनके साथ डिप्टी स्पीकर राज कुमारी थापा और अन्य मंत्री और विधायक भी मौजूद थे.
तीर्थयात्री माउंट कैलाश और मानसरोवर झील तक पहुंचने के लिए तिब्बती स्वायत्त क्षेत्र में 11 दिन बिताएंगे. चीन की सीमा पर पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ़ चाइना के अधिकारियों और सेना के जवानों ने उनका स्वागत किया.
पांच साल के अंतराल के बाद, सिक्किम में नाथुला दर्रे के माध्यम से कैलाश मानसरोवर यात्रा फिर से शुरू हो गई है, जिसमें 36 तीर्थयात्रियों का एक जत्था (23 पुरुष और 13 महिलाएं) सोमवार को 18 मील बेस की ओर रवाना हुआ, जो 20 जून को मानसरोवर की अपनी निर्धारित यात्रा से पहले है.
धार्मिक मान्यता
कैलाश पर्वत को भगवान शिव का निवास स्थान माना जाता है. कैलाश को डेमचोक के निवास स्थान के रूप में जाना जाता है. कैलाश पर्वत पहले तीर्थंकर ऋषभदेव से जुड़ा है. कैलाश को स्वास्तिक पर्वत (विशेषकर तिब्बती बोन धर्म में) के रूप में पूजा जाता है. मानसरोवर झील को पवित्र माना जाता है और यह हिंदू धर्म में जुड़ा एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है.
कैलाश मानसरोवर का इतिहास
मानसरोवर यात्रा प्राचीन काल से होती आ रही है, जिसमें भक्त भगवान शिव की पूजा करते हैं और मानसरोवर झील के पवित्र जल में स्नान करने आते हैं. यह यात्रा खासकर हिंदू, बौद्ध, जैन और बोन धर्मों में महत्वपूर्ण मानी जाती है.
बीते दिन नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय में इस यात्रा को लेकर बैठक हुई थी. जिसमें यह फैसला लिया गया कि, इस यात्रा का संचालन कुमाऊं मंडल विकास निगम करेगा. यात्रा की शुरुआत दिल्ली से होकर पिथौरागढ़ के लिपुलेख पास से जाएगी. पहले यात्रा का रास्ता काठगोदाम और अल्मोड़ा से होता था, लेकिन अब यह टनकपुर से चंपावत होते हुए आगे बढ़ेगी.
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