KANPUR ADMINISTRATION NEWS : कलेक्ट्रेट (Collectorate) में रोज़ाना हजारों फाइलों और पत्रों के बीच दौड़ती रहने वाली नजारत अनुभाग की कर्मचारी कमला परिहार ने शायद ही कभी सोचा होगा कि अपने ही विभाग में काम करने के बावजूद उन्हें अपनी खतौनी का नाम सही कराने में तीन साल लग जाएंगे।
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28 जुलाई 2023 को दिया गया उनका आवेदन लगातार तारीखों में उलझता रहा और तहसील की गलियों में चक्कर काटते-काटते मामला वहीं का वहीं अटका रहा।
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कमला परिहार बताती हैं कि नर्वल तहसील के कार्मिकों द्वारा कभी उनसे दो गवाह बुलाने को कहा गया तो कभी ग्राम प्रधान का पत्र। वह हर निर्देश का पालन करती रहीं। भाई और रिश्तेदारी में सास को लेकर गईं, बयान लिखवाया, दस्तावेज़ जमा किए। पर हर बार उम्मीद टूटती गई। बाबू से बात करने को फोन किया तो कई बार घंटियों के बाद भी उधर से कोई जवाब नहीं मिला।
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6 नवंबर को उन्होंने हिम्मत जुटाई और DM JP SINGH से सीधे मिलकर अपनी व्यथा रखी। शांत स्वर में कही गई उनकी पीड़ा सुनकर जिलाधिकारी ने अकारण विलंब पर सख्ती से नाराजगी जताई। एक कर्मचारी को ही उसके अधिकारों के लिए इतनी दौड़ लगवाना, वह भी तीन वर्षों तक समझ से परे है। जिलाधिकारी ने इसे गंभीर लापरवाही माना और तत्काल समाधान के निर्देश दिए।
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इसके बाद तस्वीर बदली। अगले ही दिन 7 नवंबर को खतौनी में ‘कमलावती’ के स्थान पर सही नाम ‘कमला परिहार’ दर्ज हो गया। सोमवार को जब कमला परिहार फिर से कलेक्ट्रेट पहुंचीं, इस बार हाथ में कोई फाइल नहीं थी बल्कि चेहरे पर राहत थी। उन्होंने जिलाधिकारी से मिलकर कहा कि तीन साल की थकान 24 घंटे में मिट गई।
डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि शिकायतों के जल्द निस्तारण ही प्राथमिकता है। सरकारी कर्मचारी हो या जनता परेशानी किसी को नहीं होनी चाहिए।

