KANPUR NEWS: 16 साल पुराने मामले में मंडलायुक्त (Divisional Commissioner) के. विजयेन्द्र पांडियन की ‘कोर्ट ने मसवानपुर में ग्राम सभा की 125 crore कीमत की 31 बीघा जमीन के नामांतरण और उसके आधार पर हुए बैनामों के पर फैसला सुनाया।
कोर्ट ने तत्कालीन नायब तहसीलदार (न्यायिक) की ओर से 31 दिसंबर 2010 को पारित नामांतरण आदेश को विधि विरुद्ध मानते हुए निरस्त कर दिया। अभिलेखों से छेड़छाड़ और कथित फर्जी नामांतरण की जांच कर दोषी पिता-पुत्र सहित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के आदेश सिंह DM को दिए हैं।
KDA और आवास विकास को 31 बीघा जमीन पर कब्जा लेने के आदेश जारी किए। मंडलायुक्त की कोर्ट ने जमीन बेचने के आरोपित राजेश तिवारी, सौरभ तिवारी के साथ ही राजस्व अभिलेखों में गड़बडी करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के आदेश दिए हैं।
शासकीय अधिवक्ता नीरज सिंह सेंगर ने बताया कि मामला मसवानपुर में मामा तालाब के पास गाटा संख्या 520 की जमीन के नामांतरण से संबंधित है। आरोप है कि मसवानपुर निवासी राजेश तिवारी और उनके पुत्र सौरभ ने वर्ष 2010 में 31 बीघा जमीन अपने नाम दर्ज कराने के बाद बेच दिया था।
जयशंकर बाजपेयी ने मंडलायुक्त कोर्ट में निगरानी दाखिल की थी। जिस गाटा संख्या 520 के संबंध में नामांतरण आदेश पारित किया गया था, उसके मूल अभिलेखों में आदेश की प्रमाणित प्रति तक उपलब्ध नहीं थी।
मंडलायुक्त न्यायालय ने केडीए, आवास विकास परिषद और राजस्व विभाग से संबंधित अभिलेख और जांच आख्या तलब की। 25 मार्च 2026 की संयुक्त जांच आख्या और 31 जुलाई 2026 को उपलब्ध कराए गए राजस्व अभिलेखों का परीक्षण किया गया।
जांच में गाटा संख्या 520 से संबंधित खातों और खसरों में आबादी के साथ व्यक्तियों के नाम दर्ज मिले। जांच में गाटा संख्या 520 से संबंधित 52,340 वर्गमीटर भूमि का उल्लेख मिला। उपलब्ध अभिलेखों और बैनामों के आधार पर करीब 24,872.04 वर्गमीटर जमीन के विक्रय का तथ्य भी सामने आया। कोर्ट ने निगरानी स्वीकार करते हुए 31 दिसंबर 2010 को जारी हुए नामांतरण आदेश निरस्त कर दिया।
मंडलायुक्त की कोर्ट ने माना कि इतने बड़े भूखंड के संबंध में नामांतरण प्रक्रिया की वैधानिकता स्पष्ट नहीं है। जिस आदेश के आधार पर आगे की कार्रवाई हुई, उसकी मूल पत्रावली का उपलब्ध न होना भी गंभीर मामला है।

