KANPUR NEWS: डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह (DM Jitendra Pratap Singh) कानपुर में कई कार्यों और कारणों से याद किए जाएंगे।
पद संभालते ही ताबडतोड छापेमार कार्रवाई, बडे अफसरों को कारण बताओ नोटिस, विभागों में औचक निरीक्षण, निर्माण कार्य में खराबी पर कार्यदायी संस्था पर जुर्माना, जनता दर्शन और वहां आए फरियादियों के लिए चाय बिस्किट का इंतजाम। डेढ साल में IGRS और सीएम डैश बोर्ड की रैंक में सुधार न कर पाने, सीएमओ से लेकर कई अफसरों से अंदरूनी लडाई, लेकिन सबसे अधिक चर्चा रही डीएम बनाम सीएमओ की इसमें एक्शन, ड्रामा दोनों था। डीएम के कार्यकाल को चार चैप्टर में बांटकर आप को बताता हूं।
यूपी में देर रात 34 आईएएस के तबादले
चैप्टर वन
फरियादी की शिकायत का त्वरित निस्तारण
डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह का तबादला हो गया है। जनवरी 2025 में कानपुर में डीएम पद संभालते ही उन्होंने छापेमार कार्रवाई शुरू कर दिया। डीएम ने आते ही स्कूलों, अस्पतालों, घाटों, शासन की योजना के बने रही इमारतों समेत कई स्थान पर छापामार और व्यवस्था दुरूस्त करायी। जनसुनवाई में ऑटो चालक सम्मान, स्कूली बच्चों की फीस, सुनाई ने देने वालों को कान की मशीन मुहैया कराना, कागज में सालों से मरे व्यक्ति को जिंदा कराना, सालों से अफसरों के चौखट पर माथा रगड रहे फरियादी की फरियाद पूरी की गई। जनता दर्शन में आने वालों को चाय, बिस्किट, मठ्ठा दिया गया। फरियादियों की सुनाई और निस्तारण को प्राथमिकता में रखा गया, इस कारण कई अफसरों से लेकर बाबू को फटकार तक लगी।
कच्चे घर की जगह आकार ले रहा पक्का आशियाना
चैप्टर दो
डीएम बनाम सीएमओ
कानपुर में सबसे ज्यादा चर्चा डीएम और सीएमओ की आपस में खींचतान रही। डीएम का औचक निरीक्षण, सीएमओ कार्यालय से वीडियो और फिर नोटिस जारी करना।
विवाद इतना बढा कि सीएमओ डॉक्टर हरि दत्त नेमी ने डीएम के खिलाफ प्रेस कांफ्रेंस की, इसपर शासन ने उन्हें सस्पेंड कर दिया और डॉक्टर उदय नाथ को कानपुर का सीएमओ बना दिया। मामला हाईकोर्ट पहुंचता है और फिर लेटर लेकर आए सीएमओ और कुर्सी में बैठे सीएमओ के बीच कुर्सी युद्ध हो गया। सीएमओ को कार्यालय से निकालना, आलाधिकारियों के खिलाफ कोर्ट की अवमानना का केस तक चल गया। शासन ने काफी किरकिरी के बाद स्थानांतरण आदेश को रद्द कर निलंबित सीएमओ डॉक्टर हरी दत्त नेमी को फिर कानपुर का दायित्व दिया, वहीं सीएमओ डॉ उदयनाथ को वापस श्रावस्ती भेज दिया ।
चैप्टर र्थी
आईजीआरएस रैंक में सुधार नहीं
डीएम को अपने कानपुर के कार्यकाल में आईजीआरएस और सीएम डैश बोर्ड की रैंक में सुधार न हो पाने की कसक रहेगी। एक दफा तो आईजीआरएस रैंक 73वीं तक पहुंच गई। यही हाल सीएम डैश बोर्ड का भी रहा, राजस्व वसूली और विकास कार्यों में भी जिला पिछडता ही रहा, जिससे प्रशासन की छवि शासन में खराब रही।
प्रदेश के 75 जिलों में कानपुर को 70वीं रैंक
चैप्टर फोर
अफसरों से अंदरूनी लडाई
सूत्रों के अनुसार डीएम की कई अधिकारियों से अंदरूनी लडाई भी चलती रही। आलम यह रहा कि कुछ अफसर महीने की छुट्टी पर चले गए तो कुछ ने अपना तबादला तक करा लिया। पूर्व समाज कल्याण अधिकारी का एक वॉयरल आडियो भी काफी चर्चित रहा। जिला आबकारी अधिकारी को कई नोटिस के बाद भी कोई सुधार न हो सका।
जिला आबकारी अधिकारी को कारण बताओ नोटिस

