KANPUR NEWS : करीब 36 वर्षों तक देश-विदेश में बड़ी परियोजनाओं की जिम्मेदारी संभालने के बाद संजीव कुमार यादव ने सेवानिवृत्ति पर गांव की राह पकड़ी। अब वह पतारा विकासखंड के ग्राम ककरहिया में अपनी पैतृक जमीन पर ड्रैगन फ्रूट उगा रहे हैं।
एक एकड़ में लगाए गए करीब 1200 पौधों से उत्पादन शुरू हो चुका है और फल स्थानीय बाजार तक पहुंचने लगा है। इस नई शुरुआत में प्रदेश सरकार की उद्यान योजना से मिली ₹1.60 लाख की सहायता भी उनके लिए मददगार बनी।
इलाहाबाद एमएनआईटी से बीटेक और आईआईटी रुड़की से एमटेक संजीव कुमार यादव एनएचपीसी में डायरेक्टर के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। नौकरी के दौरान भूटान में तैनाती के समय उनका वहां के कृषि अनुसंधान संस्थानों के वैज्ञानिकों से संपर्क हुआ। यहीं से उन्हें ड्रैगन फ्रूट की खेती का विचार मिला। सेवानिवृत्ति के बाद पत्नी शिखा यादव के साथ उन्होंने इस विचार को अपने गांव में साकार किया।
7 किस्में मंगाईं, कानपुर की आबोहवा में 5 सफल
उद्यान विभाग की योजना का लाभ लेकर संजीव ने एक एकड़ खेत में करीब 1200 पौधे लगाए। इसके लिए असम, हरियाणा और उत्तराखंड से ड्रैगन फ्रूट की 7 किस्में मंगाई गईं। इनमें 5 किस्में कानपुर की जलवायु के अनुकूल पाई गई हैं। कैक्टस प्रजाति का ड्रैगन फ्रूट अपेक्षाकृत कम पानी में तैयार होता है। एक बार पौधा विकसित होने के बाद इससे करीब 20 से 25 वर्षों तक उत्पादन लिया जा सकता है।
2 क्विंटल से अधिक फल पहुंचा बाजार
संजीव के खेत से अब तक 2 क्विंटल से अधिक ड्रैगन फ्रूट बाजार भेजा जा चुका है, जबकि करीब 50 किलो फल पौधों पर तैयार हो रहा है। कानपुर में अभी ड्रैगन फ्रूट की आपूर्ति मुख्य रूप से गुजरात, महाराष्ट्र और दूसरे राज्यों से होती है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर इसकी खेती बढ़ने से शहर को ताजा फल मिलने के साथ किसानों के सामने भी हाई-वैल्यू फसल का नया विकल्प तैयार हो सकता है।
संजीव और उनकी पत्नी शिखा अपने प्रयोग को केवल अपने खेत तक सीमित नहीं रखना चाहते। वे आसपास के किसानों को फार्म पर बुलाकर ड्रैगन फ्रूट की खेती, पौधों की देखभाल और उत्पादन से जुड़ी जानकारी भी दे रहे हैं। उनके फार्म पर 2 स्थानीय लोगों को नियमित रोजगार मिला है।
दूसरे किसानों के लिए भी खोल रहे नई राह
मुख्य विकास अधिकारी अभिनव जे. जैन ने कहा कि संजीव कुमार यादव का प्रयास कृषि विविधीकरण का अच्छा उदाहरण है। उद्यान विभाग की योजनाओं के माध्यम से किसानों को परंपरागत खेती के साथ अधिक मूल्य वाली फसलों की ओर प्रोत्साहित किया जा रहा है। ड्रैगन फ्रूट जैसी फसलों का स्थानीय स्तर पर सफल उत्पादन दूसरे किसानों को भी नई संभावनाओं से जोड़ सकता है।
एक नजर में
1 एकड़ में ड्रैगन फ्रूट की खेती
1200 पौधे लगाए
₹1.60 लाख सरकारी सहायता
7 किस्में मंगाईं, इनमें 5 सफल
2 क्विंटल से अधिक फल बाजार पहुंचा
20 से 25 वर्ष तक उत्पादन की क्षमता

