Pashupatinath: नेपाल के काठमांडू में स्थित पशुपतिनाथ मंदिर (Pashupatinath) और भारत के उत्तराखंड में स्थित केदारनाथ धाम, भले ही भौगोलिक रूप से दूर हों, लेकिन इनके बीच एक गहरा पौराणिक और धार्मिक संबंध है. Pashupatinath
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मान्यता है कि जो भक्त केदारनाथ की यात्रा करता है, उसके लिए पशुपतिनाथ के दर्शन करना विशेष रूप से शुभ और आवश्यक होता है. ऐसे में आइए जानते हैं कि आखिर पशुपतिनाथ के दर्शन के बिना केदारनाथ की यात्रा क्यों अधूरी मानी जाती है और इनसे जुड़े रहस्य क्या-क्या हैं.
पौराणिक कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, महाभारत के युद्ध में पांडवों ने भारी रक्तपात किया था, जिससे भगवान शिव उनसे अप्रसन्न हो गए. पांडव, युद्ध के पापों से मुक्ति पाने के लिए भगवान शिव की खोज में निकले, लेकिन शिव उनसे बचने के लिए केदारनाथ में भैंसे (महिष) का रूप लेकर धरती के भीतर समा गए. भीम ने उन्हें पहचान लिया और उनकी पूंछ पकड़कर बाहर खींच लिया. इस दौरान भगवान शिव का सिर अलग होकर नेपाल के पशुपतिनाथ में प्रकट हुआ, जबकि उनका धड़ केदारनाथ में और शेष अंग पंचकेदार के अन्य स्थानों पर प्रकट हुए. इसलिए केदारनाथ में भगवान शिव के ‘शरीर रूप’ के दर्शन होते हैं, जबकि पशुपतिनाथ में उनके ‘मुख रूप’ के. मान्यता है कि जब तक भक्त दोनों स्वरूपों के दर्शन नहीं करता, तब तक तीर्थयात्रा पूर्ण नहीं मानी जाती.
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दोनों धामों के दर्शन का महत्व
भक्तों का विश्वास है कि केदारनाथ और पशुपतिनाथ, दोनों के दर्शन करने से भगवान शिव की पूर्ण कृपा प्राप्त होती है और सभी पाप नष्ट हो जाते हैं. नेपाल और भारत में शिव उपासना की गहरी तांत्रिक परंपरा है- पशुपतिनाथ शिव की शक्ति का केंद्र माना जाता है, जबकि केदारनाथ उनकी भक्ति का प्रतीक है.
पशुपतिनाथ और कलियुग का अंत
पशुपतिनाथ मंदिर से जुड़ी एक और मान्यता कलियुग के अंत से संबंधित है. कहा जाता है कि जब कलियुग अपने चरम पर पहुंचेगा और समाज में धर्म, सत्य तथा नैतिकता का पूर्ण पतन होगा, तब इस मंदिर का शिवलिंग बागमती नदी में विलीन हो जाएगा. यह घटना कलियुग के अंत और नए युग के आरंभ का संकेत मानी जाती है. जब तक भगवान शिव इस स्थान पर विराजमान हैं, तब तक यह स्थल आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर रहेगा और नकारात्मक शक्तियां इसे पूरी तरह प्रभावित नहीं कर पाएंगी.
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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. JAIHINDTIMES इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

