उच्च न्यायालय (HIGH COURT) ने पुणे के दंपति से जुड़े तलाक के एक मामले में यह कहा है। बिना सबूत चरित्रहीन और शराबी कहना मानहानि है और यह क्रूरता के समान है। इसके साथ ही बॉम्बे हाईकोर्ट ने तलाक देने के पुणे फैमिली कोर्ट के आदेश को सही ठहराया और उसे बरकरार रखा है। न्यायमूर्ति नितिन जामदार और न्यायमूर्ति शर्मिला देशमुख की खंडपीड ने यह आदेश 50 वर्षीय महिला की अपील को खारिज करते हुए 12 अक्टूबर को सुनाया।
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#HIGHCOURT NEWS: ‘पति को चरित्रहीन-शराबी’ कहने के लिए दिखाना होगा सबूत
by ARTI PANDEYby ARTI PANDEY -
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KANPUR JYOTI MURDER CASE: जाने, ज्योति हत्याकांड मामले में आरोपियों पर लगी कौन सी धारा और कितना लगा अर्थदंड
by ARTI PANDEYby ARTI PANDEYसात साल तक चली न्यायिक प्रक्रिया में 560 तारीखें पर सुनवाई की गई। 45 लोगों की गवाही भी कराई गई। 13 अगल-अलग कोर्ट में सुनवाई की गई। पीयूष को हाईकोर्ट (High Court) से जमानत मिली तो पिता ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। सुप्रीम कोर्ट से जमानत पर रोक तो नहीं लगी लेकिन सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने तीन महीने में केस में फैसला सुनाने के आदेश लोअर कोर्ट को दिए थे।
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High Court News: पहली पत्नी की मर्जी के खिलाफ पति संग रहने का आदेश नहीं दे सकती COURT
by ARTI PANDEYby ARTI PANDEYयदि पहली पत्नी की मर्जी के खिलाफ पति के साथ रहने को बाध्य करती है तो यह महिला के गरिमामय जीवन तथा व्यक्तिगत स्वतंत्रता के सांविधानिक अधिकार का उल्लघंन होगा। कोर्ट ने कुरान की सूरा चार आयत तीन के हवाले से कहा, यदि मुस्लिम अपनी पत्नी तथा बच्चों की सही देखभाल करने में सक्षम नहीं है तो उसे दूसरी शादी करने की इजाजत नहीं होगी।
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Piyush Jain Case: लॉ की किताबों में शामिल होगा पीयूष जैन
by ARTI PANDEYby ARTI PANDEYPiyush Jain Case: इत्र कारोबारी पीयूष जैन (Piyush Jain) की जमानत को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने रिपोर्टेड जजमेंट दिया है। इसका मतलब ये है कि इसे लॉ की किताबों में पीयूष जैन वर्सेज यूनियन ऑफ इंडिया (Piyush Jain Vs Union Of India) के नाम से शामिल किया जाएगा। इसे दूसरे मामलों में वकील अपनी दलीलों में शामिल कर सकेंगे।
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High Court News: आपराधिक मामले लंबित रहने से सरकारी कर्मचारी का नहीं रोक सकते प्रमोशन
by ARTI PANDEYby ARTI PANDEYक्रिमिनल केस (Criminal Case) लंबित रहने के बावजूद याची को नौकरी में बनाए रखा गया है तो ऐसे में क्रिमिनल केस के आधार पर प्रमोशन से वंचित रखना गलत है। कहा गया था कि जब आपराधिक केस के आधार पर की गई बर्खास्तगी को हाईकोर्ट (High Court) ने रद्द कर बहाली का आदेश दिया तो पुन: उसी आधार पर प्रमोशन देने से इन्कार करना अवैधानिक है।
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#HIGHCOURT : बालिग पत्नी को नाबालिग पति की अभिरक्षा का अधिकार नहीं
by ARTI PANDEYby ARTI PANDEYइलाहाबाद हाईकोर्ट (HIGH COURT) ने कहा है कि पति नाबालिग है तो वह कानूनी रूप से अपनी बालिग पत्नी की अभिरक्षा में नहीं रह सकता है। जब तक कि वह…

