Allahabad High Court news : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने योगी सरकार को महाकुंभ (Mahakumbh 2025) भगदड़ मामले में शनिवार को कड़ी फटकार लगाई है। भगदड़ में जान गंवाने वालों को अब तक मुआवजा सरकार ने नहीं दिया है।
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अवकाश बेंच के जस्टिस सौमित्र दयाल सिंह और संदीप जैन की खंडपीठ ने उदय प्रताप सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा- सरकार का रवैया ‘अस्थिर’ और ‘नागरिकों की पीड़ा के प्रति उदासीन’ है। कोर्ट ने भगदड़ में सभी मौतों, मरीजों और डॉक्टरों की रिपोर्ट तलब की है।
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कोर्ट ने कहा- राज्य सरकार मुआवजा से संबंधित पूरा ब्योरा दे। राज्य सरकार नागरिकों के ट्रस्टी की तरह काम करती है, उसे पीड़ितों के प्रति संवेदनशीलता दिखानी चाहिए। 29 जनवरी को मौनी अमावस्या पर शाही स्नान से पहले आधी रात में भगदड़ हुई थी। जिसमें सरकार ने 30 मौतों को स्वीकार किया था। 25-25 लाख मुआवजे का ऐलान किया था।
Allahabad High Court ने उदय प्रताप सिंह की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। उदय के मुताबिक, महाकुंभ भगदड़ में उनकी पत्नी सुनैना देवी (52) को गंभीर चोटें आईं। इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। लेकिन उनकी पत्नी के शव का न तो पोस्टमॉर्टम हुआ, न ही उन्हें कोई जानकारी दी गई। उन्हें यह भी नहीं बताया गया कि सुनैना को कब और किस हालत में अस्पताल लाया गया था। कोर्ट ने इसे गंभीर चूक मानते हुए सरकारी संस्थानों के काम करने के तरीके पर सवाल उठाए हैं।
बेंच ने कहा- जब सरकार ने मुआवजे की घोषणा कर दी, तो उसको समय से और गरिमा के साथ परिवारों को दे देना चाहिए था। नागरिकों की कोई गलती नहीं थी और ऐसी त्रासदियों में राज्य का यह कर्तव्य है कि वह पीड़ित परिवारों की देखभाल और सहायता करे।
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कोर्ट ने याचिका में सीएमओ प्रयागराज, प्राचार्य मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज प्रयागराज, स्वरूप रानी नेहरू अस्पताल, प्रयागराज, टीबी सप्रू अस्पताल प्रयागराज, मोतीलाल नेहरू डिविजनल अस्पताल प्रयागराज, जिला महिला अस्पताल प्रयागराज, इलाहाबाद मेडिकल एसोसिएशन व इलाहाबाद नर्सिंग होम एसोसिएशन को पक्षकार बनाते हुए नोटिस जारी किया।

