Ladies First: क्या आपने कभी सोचा है कि लेडीज फर्स्ट बोलने की शुरूआत कहां से हुई। आपको बता दें कि Ladies First बोलने का ट्रेंड कोई आज का नहीं है, बल्कि इसका इतिहास सदियों पुराना है। Ladies First
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इसकी जड़ें यूरोप के रॉयल और रिच फैमिली से जुड़ी हुईं हैं। उस दौरान महिलाओं को खास इज्जत दी जाती थी। पुरुषों को भी यही सिखाया जाता था कि वे उनका सम्मान करें।
आज भी जारी है परंपरा
आज महिलाएं भले ही पुरुषों से कदम से कदम मिलाकर चल रहीं हैं, लेकिन से परंपरा अभी भी कहीं न कहीं जारी है। हालांकि इसका तरीका और सोच थोड़ी बदल सी गई है। अगर आप अभी इसका इतिहास नहीं जानते थे तो आपको ये लेख जरूर पढ़ना चाहिए। हम आपको Ladies First बोलने की शुरुआत कहां से हुई, इसके बारे में बताने जा रहे हैं। आइए जानते हैं विस्तार से –
यूरोप से शुरू हुई थी परंपरा
एक फेमस मैगजीन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, Ladies First कहने की परंपरा पुराने यूरोप से शुरू हुई थी। उस समय वहां के अमीर लोग ये मानते थे कि महिलाओं को सम्मान देना चाहिए। उस दौरान महिलाओं को नाजुक और खास समझा जाता था। इसी कारण शुरु से पुरुषों को सिखाया गया कि वे महिलाओं के लिए दरवाजा खोलें, उन्हें आगे चलने दें या बैठने के लिए कुर्सी दें। इस परंपरा का ये मतलब बिल्कुल भी नहीं था कि महिलाएं कमजोर हैं। बस ये उन्हें सम्मान और प्यार देने का खास तरीका था।
जर्मनी की गुफाओं से…
एक ये भी कहावत है कि Ladies First का ट्रेंड जर्मनी की गुफाओं से आया है। बताया जाता है कि जब भी कोई जानवर आता था तो गुफा में रहने वाले पुरुष महिलाओं को आगे कर देते थे, इसके बाद वे पीछे से हमला करते थे।
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Titanic से भी जुड़ा है इतिहास
1912 में तब टाइटैनिक का जहाज डूब रहा था, उस दौरान भी ‘Ladies And Children First’ को पहले निकालने का निर्देश दिया गया था। ये भी Ladies First की सोच को मजबूत करता है। आपको बता दें कि टाइटैनिक की घटना के बाद ये और भी बड़े स्तर पर स्वीकार कर लिया गया था।

