KANPUR BIG NEWS : सालों से मंडलीय कार्यालय को खोले जाने की जमीन को लेकर चल रही जद्दोजहद अब फिर से शुरू होने वाली है।
बीते रोज KDA OFFICER की मंडलायुक्त के सामने सिविल लाइंस स्थित म्योर मिल में मंडलीय कार्यालय खोले जाने की गई सभी प्रेजेंटेशन बेकार हो गई है। यहां पर पुलिस कमिश्नर और अन्य सरकारी कार्यालय बनाए जाने की भी कवायद की जा रही थी, जिसपर अब विराम लग गया है।
सिविल लाइंस स्थित म्योर मिल की करीब 1.50 लाख वर्गमीटर भूमि को लेकर नेशनल टेक्सटाइल्स कारपोरेशन (NTC) और जिला प्रशासन के बीच टकराव की स्थिति है। प्रशासन ने इस जमीन को नजूल रिकार्ड में दर्ज कर कब्जा लेने की प्रक्रिया की, लेकिन एनटीसी ने इस कार्रवाई को कानून विरुद्ध बताते हुए इलाहाबाद HIGH COURT में चुनौती दी है। अब हाई कोर्ट के फैसले पर केंद्र और राज्य प्रशासन की निगाहें टिकी हैं।
प्रशासनिक अफसर का कहना है कि प्रशासन ने केवल राज्य सरकार के आदेशों के अनुरूप NAZUL संपतियों के पुनः अधिग्रहण की कार्रवाई की है। मामला हाई कोर्ट में विचाराधीन है, जो भी आदेश आएगा उसका अनुपालन किया जाएगा।
म्योर मिल की जमीन राज्य सरकार के कब्जे में
म्योर मिल का विवाद गहराया, एनटीसी ने शासन को लिखा लेटर
कानपुर सहायक आयुक्त औषधि और ड्रग इंस्पेक्टर मुख्यालय अटैच
सालों से नेपाल तक बेची जा रही नशीली और नकली दवाएं
एनटीसी उप-कार्यालय म्योर मिल इंचार्ज नरेन्द्र कुमार कहते हैं कि मिल के साथ ही जमीन की सुरक्षा की हमारी जिम्मेदारी हैं। मिल परिसर के बंगलों में कोई – अनाधिकृत कब्जेदार नहीं है, केवल कर्मचारियों का प्रवास हैं। हाई कोर्ट का जो भी निर्णय आएगा, उसे सभी स्वीकार करेंगे।
NTC ने हाईकोर्ट में दाखिल अपनी याचिका में कहा है कि प्रशासन ने बिना वैधानिक नोटिस और कानूनी प्रक्रिया के इस संपत्ति को अपने नाम दर्ज किया है, जो कि 1974 के द सिक टेक्सटाइल्स अंडरटेकिंग (नेशनलाइजेशन) एक्ट का उल्लंघन है। इस अधिनियम के तहत देशभर की कपड़ा मिलों का अधिग्रहण किया गया था। इस एक्ट के तहत कानपुर की अथर्टन मिल, म्योर मिल, न्यू विक्टोरिया मिल, स्वदेशी काटन मिल और लक्ष्मी रतन काटन मिल सहित प्रदेश की कुल 11 मिलें एनटीसी के अधिकार क्षेत्र में आ गई थीं ।
एनटीसी के अधिकारियों का कहना है कि राज्य और केंद्र सरकार के बीच इस मुद्दे पर वर्ष 2023 में गठित संयुक्त समिति भी अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं ले पाई हैं। हर माह की रिपोर्ट एनटीसी मुख्यालय से केंद्र सरकार को भेजी जा रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई समाधान नहीं निकल रहा है। इसी बीच प्रशासन द्वारा कब्जा लिए जाने की कवायद ने विवाद को और गहरा दिया है।
विवाद गहराता जा रहा
सिविल लाइंस स्थित म्योर मिल की जमीन पर बीते रोज प्रशासन ने राज्य सरकार के कब्जे का बोर्ड टांग दिया था, जिसपर अब विवाद गहराता जा रहा है। बता दें कि नेश्नल टेक्सटाइल कॉरपोरेशन लिम्टेड (NTC) सब ऑफिस कानपुर के प्रभारी अधिकारी सतीश कुमार की ओर से शासन को इस संबंध में लेटर भेजा गया है। लेटर में प्रशासन पर तथ्यों की अनदेखी का आरोप लगाया गया। KANPUR NEWS
“अनावंटित सरकारी भूमि” घोषित
सिविल लाइन्स स्थित ऐतिहासिक म्योर मिल की विशाल जमीन अब राज्य सरकार के कब्जे में वापस आ गई। जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह (DM Jitendra Pratap Singh) की मंजूरी के बाद एडीएम वित्त एवं राजस्व (प्रभारी अधिकारी नजूल) के आदेश से इस पर पुनर्प्रवेश कर दिया गया है। करीब 15 हेक्टेयर यानी डेढ़ लाख वर्ग मीटर क्षेत्रफल वाली यह भूमि अब “अनावंटित सरकारी भूमि” घोषित की गई है और परिसर पर पुनर्प्रवेश का बोर्ड भी अंकित करा दिया गया।
शासन को लिखा लेटर
NTC के प्रभारी अधिकरी सतीश कुमार ने डीएम, कमिश्नर और प्रमुख सचिव शहरी एवं आवास नियोजन अनुभाग-4 को लेटर लिखा है। इसमें बताया गया है कि म्योर मिल्स राष्ट्रीय वस्त्र निगम लिमिटेड (NTC) के अधीन है। म्योर मिल की संपत्तियों से संबंधित विवाद का निस्तारण समझौता दिनांक 13.10.1990 के माध्यम से किया गया था। उक्त संधि के अंतर्गत जिला प्रशासन द्वारा यह प्रतिबद्धता दी गई थी कि आगे से राष्ट्रीय वस्त्र निगम की किसी भी संपत्ति पर कब्जा या अधिग्रहण नहीं किया जाएगा।
प्रभारी अधिकारी ने लेटर में The Textile Undertakings (Nationalization) Laws (Amendment and Validation) Act 2014 जिक्र किया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि 2019 में तत्कालीन ADM वित्त से म्योर मिल की संपत्तियों का बकाया लीज रेन्ट जमा करने को लीज रेंट का विवरण मांगा गया था। लेकिन उस लेटर का कोई जवाब नहीं मिला, जिसके कारण लीज रेंट का भुगतान संभव नहीं हो सका। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि मिल संपत्ति से संबंधित की गई अनुचित एवं अवैधानिक अंतरण कार्यवाही को तत्काल निरस्त किया जाए।

