GSVM Medical College News : विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस (World Suicide Prevention Day) के अवसर पर जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज (GSVM Medical College) के मनोचिकित्सा विभाग (Department of Psychiatry) की ओर से आत्महत्या की रोकथाम और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने आत्महत्या के जोखिम कारकों, चेतावनी संकेतों और समय रहते मानसिक स्वास्थ्य सहायता उपलब्ध कराने के महत्व पर चर्चा की।
कार्यक्रम में अतिथि वक्ता डॉ. गणेश शंकर ने आत्महत्या से जुड़े जोखिम कारकों और चेतावनी संकेतों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति के व्यवहार या मनोदशा में अचानक बदलाव, अत्यधिक निराशा, स्वयं को बोझ समझना, लोगों से दूरी बनाना अथवा जीवन समाप्त करने की बात करना जैसे संकेतों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
Department of Psychiatry मनोचिकित्सा विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) धनंजय चौधरी ने कहा कि आत्महत्या गंभीर लेकिन रोकथाम योग्य सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या है। आत्महत्या के विचार व्यक्त करने वाले व्यक्ति की बात संवेदनशीलता से सुनना, उसे अकेला न छोड़ना और जल्द से जल्द मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ की मदद दिलाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि आत्महत्या को किसी एक कारण से जोड़ना उचित नहीं है, बल्कि इसके पीछे जैविक, मनोवैज्ञानिक और सामाजिक कारकों की जटिल भूमिका हो सकती है।
कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि भारत सरकार की 24 घंटे उपलब्ध टेली-मानस सेवा 14416 अथवा 1800-89-14416 पर मानसिक स्वास्थ्य सहायता ली जा सकती है।
इस अवसर पर प्रधानाचार्य प्रो. (डॉ.) संजय काला, उप-प्रधानाचार्या डॉ. ऋचा और एसआईसी डॉ. सौरभ उपस्थित रहे। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य को लेकर समाज में व्याप्त संकोच और भ्रांतियों को दूर करने तथा मानसिक परेशानी से जूझ रहे लोगों को समय पर चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराने पर जोर दिया।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों के लिए निबंध प्रतियोगिता भी आयोजित की गई। इसमें MBBS 2022 बैच की डॉ. अरीबा सरफराज ने प्रथम, एलएलआर कॉलेज ऑफ नर्सिंग की प्रियम शुक्ला ने द्वितीय और जीएसवीएम कॉलेज ऑफ नर्सिंग की विशाखा ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। नुक्कड़ नाटक के माध्यम से विद्यार्थियों ने मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशीलता, आत्महत्या के चेतावनी संकेतों की पहचान और जरूरतमंद व्यक्ति को समय पर सहयोग देने का संदेश दिया।
कार्यक्रम में मनोचिकित्सा विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. आयुषी डी. सिंह, डॉ. कृतिका चावला, डॉ. अमन नकवी, सीनियर रेजिडेंट डॉ. राधा, डॉ. क्षितिज, डॉ. सुधा, डॉ. विदुषी तथा जूनियर रेजिडेंट डॉ. अभिषेक और डॉ. मनीष मौजूद रहे। कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों और समाज को संदेश दिया गया कि आत्महत्या की रोकथाम सामूहिक जिम्मेदारी है और संवेदनशील संवाद, समय पर पहचान, उपचार तथा परिवार के सहयोग से किसी व्यक्ति का जीवन बचाया जा सकता है।

