Jitiya Vrat 2026 : प्रत्येक साल आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को जितिया व्रत (Jitiya Vrat 2026) किया जाता है। इस वर्ष जितिया व्रत की डेट को लेकर लोगों में असमंजस की स्थिति बन रही है। Jitiya Vrat 2026
इस दिन सुहागिन महिलाएं संतान के अच्छे स्वास्थ्य और लंबी आयु के आशीर्वाद की प्राप्ति के लिए व्रत करती हैं। आइए जानते हैं कि जितिया व्रत की डेट और शुभ मुहूर्त के बारे में।
जितिया 2026 कब है?
आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 3 अक्तूबर 2026 को सुबह 7 बजकर 59 मिनट पर शुरू होगी।
इसका समापन अगले दिन यानी 4 अक्तूबर को सुबह 5 बजकर 51 मिनट पर होगा।
जितिया व्रत शनिवार, 3 अक्तूबर 2026 को रखा जाएगा।
इस साल जितिया व्रत का पारण रविवार, 4 अक्तूबर 2026 को किया जाएगा।
जितिया 2026 पूजा का शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4 बजकर 38 मिनट से 5 बजकर 26 मिनट तक।
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11 बजकर 46 मिनट से दोपहर 12 बजकर 34 मिनट तक।
प्रदोष काल: शाम 6 बजकर 5 मिनट से रात 8 बजकर 29 मिनट तक।
निशिता मुहूर्त: रात 11 बजकर 46 मिनट से देर रात 12 बजकर 35 मिनट तक।
3 अक्तूबर 2026, शनिवार का चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
काल: सुबह 6:14 से 7:43 तक
शुभ: सुबह 7:43 से 9:12 तक
रोग: सुबह 9:12 से 10:41 तक
उद्वेग: सुबह 10:41 से दोपहर 12:11 तक
चर: दोपहर 12:11 से 1:40 तक
लाभ: दोपहर 1:40 से 3:09 तक
अमृत: दोपहर 3:09 से शाम 4:38 तक
काल: शाम 4:38 से 6:07 तक
रात्रि का चौघड़िया
लाभ: शाम 6:07 से रात 7:38 तक
उद्वेग: रात 7:38 से 9:09 तक
शुभ: रात 9:09 से 10:40 तक
अमृत: रात 10:40 से 12:11 तक
चर: रात 12:11 से 1:42 तक
रोग: रात 1:42 से 3:13 तक
काल: सुबह 3:13 से 4:44 तक
लाभ: सुबह 4:44 से 6:15 तक
महत्व (Jitiya Vrat significance)
धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत को करने से साधक को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है और संतान को दीर्घायु का आशीर्वाद प्राप्त होता है। पौराणिक कथा के अनुसार, जगत के पालनहार भगवान श्रीकृष्ण ने अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा के गर्भ में पल रहे संतान को अपना सर्वस्व पुण्य फल देकर जीवित कर दिया था। इसी वजह से उत्तरा के पुत्र को जीवित्पुत्रिका कहा गया। तभी से हर साल आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर जितिया व्रत किया जाता है।
व्रत पारण (Jitiya Vrat 2026 Paran Vidhi)
जितिया व्रत (Jitiya Vrat Puja Vidhi) का पारण तीसरे दिन विधिपूर्वक किया जाता है। अष्टमी तिथि पर सुबह स्नान करने के बाद सूर्य देव को जल अर्पित करें। पारण के दौरान रागी की रोटी, तोरई, नोनी का साग और चावल का सेवन करने का रिवाज पुराने समय से चला आ रहा है।
जितिया व्रत के मंत्र
1. कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।
सदा बसन्तं हृदयारबिन्दे भबं भवानीसहितं नमामि।।
2. सर्व मंगल मांग्लयै शिवे सर्वार्थ साधिके |
शरण्ये त्रयम्बके गौरी नारायणी नमोस्तुते ||
3. वसुदेवसुतं देवं कंसचाणूरमर्दनम् ।
देवकी परमानन्दं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् ।।

