KANPUR BIG NEWS: LIC के 350 अफसर व कर्मचारियों को जनगणना ड्यूटी करनी होगी। कानपुर मुख्यालय वाले नॉर्थ सेंट्रल जोन इंश्योरेंस इम्प्लॉइज संगठन ने रिट-ए संख्या 7210/2026 दाखिल कर एलआईसी कर्मचारियों को जनगणना कार्य में लगाए जाने को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
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एलआईसी कर्मचारी संगठन की याचिका (Petition) को हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने खारिज कर दिया है। पूरे मामले को जिला प्रशासन ने लड़ा है। इसमें डीएम को पार्टी बनाया गया था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि एक बार नियुक्त किए जाने के बाद संबंधित कर्मचारी जनगणना कार्य करने के लिए बाध्य होंगे और इस दौरान उन्हें लोक सेवक माना जाएगा।
डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि हाईकोर्ट ने एलआईसी कर्मचारियों की याचिका को खारिज कर दिया है। अब सभी एलआईसी अफसर व कर्मचारियों को जनगणना की ड्यूटी करनी होगी।
एलआईसी के लगभग 350 कार्मिक जनगणना कार्य (census work) में रुचि नहीं ले रहे थे। जब उन पर दबाव बनाया गया तो एलआईसी कर्मचारी संगठन ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। नॉर्थ सेंट्रल जोन इंश्योरेंस इम्प्लॉइज संगठन ने एलआईसी कर्मचारियों को जनगणना कार्य में लगाए जाने का विरोध किया था और इसे कोर्ट में चुनौती दी थी।
सभी पक्षों की दलीलें सुनने और संबंधित कानूनी प्रावधानों का हाईकोर्ट ने परीक्षण किया। कोर्ट के मुताबिक अधिकृत अधिकारी द्वारा एलआईसी कर्मचारियों को प्रगणक और पर्यवेक्षक नियुक्त करने में कोई कानूनी त्रुटि नहीं है।
इसके साथ ही उच्च न्यायालय ने याचिका को गुण-दोष रहित बताते हुए उसे खारिज कर दिया। मामले की सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने जनगणना नियमावली, 1990 के नियम-3 की भी विस्तृत व्याख्या की। अदालत ने कहा कि प्रगणक के लिए “शिक्षक, लिपिक, कोई अधिकारी अथवा कोई भी व्यक्ति” शब्दों का प्रयोग किया गया है। “कोई अधिकारी” और “कोई भी व्यक्ति” का दायरा व्यापक है तथा इसे केवल सरकारी कर्मचारियों या स्थानीय प्राधिकारियों तक सीमित नहीं किया जा सकता। अदालत ने माना कि “प्रतिष्ठान” शब्द का अर्थ भी व्यापक है और इसमें एलआईसी जैसे वाणिज्यिक प्रतिष्ठान शामिल हैं। किसी भी प्रतिष्ठान के अधिकारी और ठर्मचारी इस जनगणना कार्य से मना नहीं कर सकते।

