KANPUR CSJMU NEWS : एक पेड़ ऐसा है, जिसे पकड़ते ही न सिर्फ शराब का नशा उतरने लगता है बल्कि हाई ब्लडप्रेशर (बीपी) भी कंट्रोल होने लगता है। वनक्षेत्रों में मिलने वाला औषधीय पेड़ दहिमन आयुर्वेदिक इलाज में कारगर है। KANPUR CSJMU NEWS
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शांत मन से इस पेड़ के स्पर्श मात्र से ही ब्लडप्रेशर कंट्रोल होने लगता हैं। ऐसे ही डायबिटीज के मरीज जिन्हें इंसुलिन का इंजेक्शन लगाना पड़ता है, वे इंसुलिन की पत्ती खाकर खुद को स्वस्थ रख सकते हैं। वहीं, हकलाने, तुतलाने और न बोलने वालों के लिए भी वच्च पौधे की पत्ती कारगर साबित होगी।
जंगलों में मिलने वाले ये औषधीय पौधे या पेड़ Chhatrapati Shahu Ji Maharaj University (सीएसजेएमयू) के बायोडायवर्सिटी पार्क (Biodiversity Park) की औषधीय वाटिका में लगे हैं। वाटिका में करीब 201 औषधीय पौधे लगे हैं, जिसमें से करीब 20 पौधे ऐसे हैं, जो विलुप्त होने की कगार पर हैं।
वाटिका के संरक्षक राकेश कुमार मिश्रा ने बताया कि वाटिका में तुलसी की सात से अधिक किस्में लगी हैं। जिसमें लौंग तुलसी, सौंफ तुलसी, पान तुलसी, कपूर तुलसी, नीबू तुलसी, इटेलियन तुलसी आदि शामिल हैं। साथ ही, भगवान कृष्ण की वैजयंती माला का पौधा वैजयंती, मखाना, श्वेत व रक्त चंदन, कुलंजन जैसे औषधीय पौधे में हैं।
सलाहकार के रूप में कार्य कर रहे एनबीआरआई के वैज्ञानिक सुभाष चंद्र ने बताया कि अधिकतर औषधीय पौधे हिमालय व वन क्षेत्रों में मिलते हैं। इस वाटिका में फॉर्मेसी, बायोटेक्नोलॉजी, लाइफ साइंस और कृषि पाठ्यक्रम के छात्र-छात्राएं व प्रोफेसर अलग-अलग पौधों पर अनुसंधान भी कर रहे हैं। जिससे इन औषधीय पौधों के प्रभाव को वैज्ञानिक स्वरूप प्रदान किया जा सके। वर्तमान में वरिष्ठ आयुर्वेदाचार्य डॉ. वंदना पाठक की अगुवाई में फार्मेसी विभाग के शिक्षकों ने दहिमन पौधे की मदद से एक आयुर्वेदिक दवा तैयार की है, जिसकी मदद से नशे के लती कई लोगों को ठीक किया गया है।
स्टीविया – इसकी पत्तियों में चीनी या गुड़ से अधिक मिठास है। यह डायबिटीज मरीजों के लिए वरदान है। इसकी पत्तियों का सेवन कर डायबिटीज मरीज बिना शुगर लेवल बढ़ाए मिठास का आनंद ले सकते हैं।
गुड़मार – इसकी पत्तियां भी शुगर मरीजों के लिए लाभकारी है। इसकी पत्ती के सेवन के बाद व्यक्ति का मिठास का अहसास ही नहीं होता है। साथ ही, यह शुगर लेवल कंट्रोल करने में भी मदद करती है।
हरजोड़ – हेयरलाइन या माइनर फ्रैक्चर में यह पौधा काफी कारगर है। आयुर्वेद के अनुसार इस पौधे की पत्तियों को लगाने और इसके सेवन से करीब आठ दिन में फ्रैक्चर ठीक होने लगता है।
सुदर्शन – इसकी पत्तियों के खाने से बुखार, कान दर्द, जोड़ों के दर्द और त्वचा से जुड़ी कुछ समस्याओं में राहत मिलती है। इसके शल्ककंद को भी खाया जा सकता है।

चिकित्सा का सबसे प्राचीन प्रारूप आयुर्वेद है। जिसमें इन सभी औषधीय पौधों की खासियतें बताई गई हैं। वाटिका में लगे औषधीय पौधों का लाभ निरंतर रूप से लिया जा रहा है। साथ ही, स्कूल व कॉलेज के छात्र वाटिका का भ्रमण कर औषधीय पौधों की जानकारी प्राप्त कर रहे हैं। क्योंकि इसमें कई विलुप्त होने की कगार पर। साथ ही, वन क्षेत्रों में होने के कारण इनके बारे में जानकारी कम होती है।
डॉ. वंदना पाठक, वरिष्ठ आयुर्वेदाचार्य
वाटिका में लगे सभी पौधे औषधी में काम आते हैं। जिनका उपयोग आयुर्वेद में बताया गया है। वाटिका में लगे सभी औषधीय पौधों पर लाइफ साइंस, फॉर्मेसी व बायोटेक्नोलॉजी विभाग के छात्र रिसर्च कर रहे हैं, जिससे इनका उपयोग वैज्ञानिक ढंग से किया जा सके।
प्रो. सुधीर अवस्थी, प्रति कुलपति-सीएसजेएमयू


