KANPUR NEWS : मसवानपुर (Maswanpur) में अर्बन सीलिंग की आठ हजार वर्गमीटर जमीन गलत तरीके से पिता-पुत्र के नाम पर रिलीज करने वाले तत्कालीन जेई और लिपिक पर अब कार्रवाई की तलवार लटक गई है।
दोनों ने अपने अधिकारों का दुरुपयोग करते हुए बगैर डीएम और शासन की अनुमति के यह जमीन पिता-पुत्र के नाम करा दी। पिता-पुत्र ने यह जमीन दूसरे लोगों को बेच दी, जिस पर कई घर और व्यावसायिक भवन बनकर खड़े हो गए हैं। जिला प्रशासन ने दोनों के खिलाफ कार्रवाई के लिए निदेशक अर्बन सीलिंग को संस्तुति की है। दोनों सेवानिवृत्त हो चुके हैं, इस वजह से राज्यपाल से अनुमति ली जाएगी।
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एडीएम फाइनेंस विवेक चतुर्वेदी ने बताया कि बिना अनुमति के अर्बन सीलिंग की आठ हजार वर्गमीटर जमीन रिलीज करने के मामले में तत्कालीन जेई व लिपिक दोषी पाए गए हैं। इनके खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की गई है। दोनों सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
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एडीएम फाइनेंस ने बताया कि मसवानपुर में 250 करोड़ रुपये की 31 बीघा सरकारी जमीन अपने नाम कराकर बेच डालने के मामले में कमिश्नर कोर्ट ने 16 साल बाद नायब तहसीलदार न्यायिक कोर्ट के नामांतरण के आदेश को खारिज कर दिया था। फर्जीवाड़ा करने वाले पिता-पुत्र और संबंधित अफसरों व कर्मचारियों पर एफआईआर का आदेश दिया था। इस पर जांच करके दोषियों की पहचान करने के लिए एसीएम षष्ठम के नेतृत्व में तहसीलदार और नायब तहसीलदार की एक जांच कमेटी बनाई थी।
कमेटी ने पाया कि तत्कालीन अर्बन सीलिंग विभाग में तैनात जेई अशोक मिश्रा और लिपिक आशुतोष प्रधान ने फर्जीवाड़ा करके 8 हजार वर्गमीटर जमीन रिलीज कर दी। अशोक मिश्रा वर्तमान समय में निदेशालय में ओएसडी हैं। कमेटी ने दोनों को दोषी पाया है। जांच रिपोर्ट में दोनों का नाम सामने आने के बाद अब निदेशक अर्बन सीलिंग से दोनों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की गई है।
कमिश्नर के आदेश पर हाईकोर्ट की रोक: नामांतरण के खिलाफ जयशंकर बाजपेई की अपील पर कमिश्नर कोर्ट ने जिस नायब तहसीलदार के 31 दिसंबर 2010 के नामांतरण आदेश को खारिज करके सभी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने का आदेश दिया था, उसे हाईकोर्ट ने स्टे कर दिया है। ऐसे में अब 250 करोड़ की जमीन को खाली कराकर केडीए और आवास-विकास कब्जा नहीं ले पाएगा। स्थिति जस की तस की रहेगी। स्टे से दस्तावेज गायब करके फर्जीवाड़ा करने वाले तत्कालीन सदर तहसील के अफसर व कर्मचारी भी बच गए हैं।

