Ganesh Chaturthi : भारत में लोग गणेश चतुर्थी (Ganesh Chaturthi 2026) को बहुत उत्साह के साथ मनाते हैं. इस साल यह 14 सितंबर को मनाया जाएगा. इस दिन भगवान गणेश की पूजा की जाती है. यह त्यौहार मुख्य रूप से महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश में मनाया जाता है. बहुत सारे लोग इस त्योहार के दौरान भगवान गणेश की मूर्ति को अपने घर लाते हैं.
अनंत चतुर्दशी पर भगवान गणेश को विदाई दी जाती है. विदाई के दिन लोग उनसे अगले साल लौटने की दुआ भी करते हैं. कुछ लोग इस त्योहार को सिर्फ दो दिन के लिए मनाते हैं तो कुछ इसे पूरे दस दिनों तक मनाते हैं। इसे गणेश महोत्सव भी कहते हैं.
भगवानगणेश चतुर्थी (Ganesh Chaturthi 2026) की पूजा करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है. सनातन धर्म में किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले गणेश जी की पूजा की जाती है. इसलिए गणेश चतुर्थी का भी विशेष महत्व है.
पंडित कहते हैं कि भगवान गणेश का जन्म दोपहर के समय हुआ था। इसलिए गणेश चतुर्थी के दिन बप्पा की स्थापना के लिए दोपहर का समय सबसे शुभ माना जाता है। 14 सितंबर अभिजीत मुहूर्त दोपहर में दोपहर 11 बजकर 52 मिनट से 12 बजकर 41 मिनट तक रहेगा। साथ ही इस दिन चित्रा नक्षत्र भी रहेगा। चित्रा नक्षत्र दोपहर में 1 बजकर 55 मिनट तक रहेगा। बता दें कि अभिजीत मुहूर्त के बारे में कहा जाता है कि 28 नक्षत्रों में अंतिम नक्षत्र माना जाता है। इसमें पूजा पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है। अगर किसी की कुंडली में किसी ग्रह की प्रतिकूल दशा चल रही होती है तो इस अवधि में पूजा पाठ करके आप उसके प्रतिकूल प्रभाव को कम कर सकते हैं। इस दौरान ब्रह्म योग का संयोग भी रहेगा। ब्रह्म योग दोपहर में 12 बजकर 47 मिनट तक रहेगा।
इस दिन लोगों को जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए, फिर घर में मंदिर की सफाई करनी चाहिए. फिर ‘दूर्वा घास’, ‘लड्डू’ और ‘मोदक’ भगवान गणेश को अर्पित किए जाते हैं. भगवान गणेश की पूजा ‘आरती’ के साथ पूरी होती है.
ऐसा माना जाता है कि भगवान गणेश की विधिवत पूजा करने से सभी समस्याओं का समाधान होता है. भगवान गणेश की मूर्ति, पानी का बर्तन, ‘पंचामृत’, लाल कपड़ा, ‘रोली’, ‘अक्षत’, ‘कलावा जनेऊ’, इलायची, नारियल, ‘चंडी का वर्क’, ‘सुपारी’, ‘लौंग’, पंचमेवा, ‘घी’ पूजा को पूरा करने के लिए कपूर’, ‘चौकी’ और ‘गंगाजल’ इकट्ठा करने की जरूरत है.
लोग जितना हर साल अपने घर में भगवान गणेश का स्वागत करना पसंद करते हैं, उतना ही उनके जाने पर उन्हें दुख भी होता है, लेकिन उनका स्वागत और विदाई दोनों ही दिल में उतनी ही भक्ति भाव से की जाती है. भगवान गणेश को आमतौर पर ‘विघ्नहर्ता’ के रूप में जाना जाता है, जिसका अर्थ है सभी बाधाओं को दूर करने वाले.

