GSVM MEDICAL COLLEGE NEWS : जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में चल रहे यूपीएओआईसीओएन-2026 के चौथे व अंतिम दिन रविवार को ईएनटी विशेषज्ञों ने दावा किया कि हर साल लगभग सात फीसदी डीजे-पटाखों के शोर से भारतीय बहरेपन की चपेट में आ रहे हैं।
खास बात यह है कि इसकी वजह से सुनने की क्षमता जाने पर लौटती नहीं है। तेज आवाज में डीजे बजाना और पटाखे फोड़ना कानों की सुनने की क्षमता के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। लगातार तेज शोर के संपर्क में रहने से कान की नाजुक संरचनाओं को नुकसान पहुंच सकता है और धीरे-धीरे सुनने की क्षमता कम हो सकती है।
मुंबई के डॉ. असीम देसाई के मुताबिक डीजे, लाउडस्पीकर और पटाखों से निकलने वाली तेज आवाज का असर तत्काल भी दिखाई दे सकता है। कान में घंटी या सीटी बजना, आवाज धीमी सुनाई देना, कान में भारीपन और बातचीत समझने में परेशानी शुरुआती संकेत हो सकते हैं। लंबे समय तक तेज शोर में रहने से यह नुकसान स्थायी हो सकता है। विशेषज्ञों ने सलाह दी कि शादी, जुलूस, धार्मिक आयोजन और समारोहों में डीजे के तेज शोर से बचना चाहिए। कार्यक्रम में डॉ. संजय काला, डॉ. हरेंद्र कुमार गौतम, डॉ. अमृता श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।
सिर एवं गर्दन के कैंसर पर मंथन : अंतिम दिन की शुरुआत सिर एवं गर्दन सत्र से हुई। विशेषज्ञों ने ट्यूमर के जोखिम कारकों, बचाव, समय पर पहचान, आधुनिक शल्य चिकित्सा की नई तकनीकों पर चर्चा की। दिल्ली के डॉ. अक्षत मलिक और डॉ. स्वाग्निक चक्रवर्ती समेत विशेषज्ञों ने अनुभव साझा किए।

