Mahabharata: विवाह के बाद ही गांधारी ने अपने नेत्रों पर पट्टी बांध ली थी। इस कथा के बारे में तो लगभग सभी को ज्ञात होगा कि एक बार गांधारी ने पुत्र मोह के चलते अपनी आंखों की पट्टी खोली थी। Mahabharata
अनोखी है परंपरा, कॉकरोच को भोग लगाने के बाद ही भोजन ग्रहण करते हैं…
लेकिन महाभारत (Mahabharata Katha) में यह कथा मिलती है कि गांधारी ने कुल 2 बार अपनी आंखों की पट्टी खोली थी। चलिए जानते हैं इस बारे में।
क्यों बांधी थी गांधारी ने पट्टी (Why did Gandhari tie the bandage?)
जब गांधारी को पता चला कि उनके होने वाले पति नेत्रहीन हैं, तो उन्होंने भी अपनी आंखों पर पट्टी बांध ली थी। गांधारी ने प्रण लिया था कि जब उनके पति ही दुनिया नहीं देख सकते, तो वे भी नहीं देखेंगी। हालांकि ऐसा दो बार हुआ, जब अपने पुत्र के चलते गांधारी ने अपनी आंखों की पट्टी हटाई थी।
गोवा के इस मंदिर में होती है देवी लैराई की पूजा, महत्व
इस मंदिर में बांधकर रखा गया है कलश, अद्भुत है वजह
मिला था ये वरदान (I got this blessing)
महाभारत में कथा मिलती है कि गांधारी भगवान शिव में असीम आस्था थी। उन्हें भगवान शिव से ही यह वरदान मिला था कि वह अपनी दिव्य दृष्टि से किसी भी व्यक्ति के शरीर को वज्र के समान कठोर बना सकती है। अपने इस वरदान का उपयोग गांधारी ने अपने पुत्र दुर्योधन के शरीर को वज्र की तरह कठोर बनाने के लिए किया था, ताकि युद्ध में उस विजय की प्राप्ति हो सके।
पहली बार तभी गांधारी ने अपने आंखों की पट्टी खोली थी। हालांकि कृष्ण जी की एक चाल के कारण दुर्योधन का पूरा शरीर व्रज का नहीं हो सका था, जिस कारण दुर्योधन की हार हुई और अंत में वह मृत्यु को प्राप्त हुआ।
जानिए, बेहद चमत्कारी है अचलेश्वर महादेव मंदिर
दूसरी बार कब खोली पट्टी (When did you open the bandage for the second time?)
महाभारत के युद्ध की समाप्ति के बाद, जब गांधारी को दुर्योधन की मृत्यु का समाचार मिला, तो वह अपने पुत्र को देखने के लिए युद्ध भूमि में गईं। तब उन्होंने दुर्योधन को आखिरी बार देखने के लिए दूसरी बार अपनी आंखों से पट्टी हटाई थी।
कब से शुरू हो रहे हैं चैत्र नवरात्र? जानिए पूजा विधि और शुभ मुहूर्त
घर में शिवलिंग रखने से पहले जान लें वास्तु के ये नियम
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। JAIHINDTIMES यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है।

