Kanpur GSVM College News: हैलट में अब आँखों का इलाज और भी बेहतर ढंग से होगा।
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज (GSVM College News) के नेत्र विभाग में 50 लाख रुपये की लागत से ऐसी मशीनें इंस्टॉल की गई हैं, जो अब तक सिर्फ बड़े प्राइवेट अस्पतालों की शोभा बढ़ाती थीं। Kanpur GSVM College News
BIG NEWS: राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश…
साइटसेवर्स संस्था के सहयोग से आई इन आधुनिक मशीनों का सबसे बड़ा फायदा उन मरीजों को होगा, जिन्हें मोतियाबिंद या काला मोतिया (ग्लूकोमा) के ऑपरेशन के बाद छोटी सी जांच या लेजर के लिए दिल्ली-लखनऊ भागना पड़ता था या फिर निजी सेंटरों पर हजारों रुपये फूंकने पड़ते थे। गुरुवार को कॉलेज प्रशासन ने इन सुविधाओं को आम जनता के लिए शुरू कर दिया है।
Mahila Aarakshan Bill 2026 : महिला आरक्षण कानून लागू
GSVM मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने बताया कि,
नेत्र विभाग में अब तक एनडी-यैग लेजर मशीन न होने की वजह से कई जटिल मामलों को बाहर रेफर कर दिया जाता था। अब यह मशीन विभाग की सबसे बड़ी ताकत बन गई है। मोतियाबिंद के ऑपरेशन के बाद अक्सर आँखों के आगे आने वाली धुंधली झिल्ली को अब इसी लेजर से चंद मिनटों में साफ किया जा सकेगा।
इसके अलावा काला मोतिया के मरीजों की आँखों का बढ़ता दबाव, जो रोशनी छीन लेता है, उसे भी अब इसी मशीन से नियंत्रित किया जाएगा। स्लिट लैंप और टोनोमीटर जैसे नए उपकरणों से अब आँखों के प्रेशर और पर्दे की बारीकी से जांच सरकारी पर्चे पर ही संभव होगी।
बिना कैसेट वाली फेको मशीन से घटेगा ऑपरेशन का बिल…
डॉ.संजय काला ने बताया कि,हैलट को मिली नई फेको मशीन तकनीक के मामले में एक कदम आगे है। पुराने मॉडल की मशीनों में हर ऑपरेशन के साथ एक महंगा ‘कैसेट’ बदलना पड़ता था, जिसका बोझ अक्सर मरीज की जेब पर आता था।
नई एडवांस फेको मशीन में इस अतिरिक्त कैसेट की जरूरत नहीं है, जिससे ऑपरेशन की लागत सीधे तौर पर कम हो जाएगी। यानी अब बिना इंजेक्शन और बिना टांके वाला मोतियाबिंद का ऑपरेशन पहले से भी कम खर्च में होगा। साथ ही नए ऑपरेटिंग माइक्रोस्कोप की मदद से अब डॉक्टर और भी ज्यादा सटीकता के साथ आंखों की सूक्ष्म सर्जरी कर सकेंगे।
Kanpur Collectorate News : कलेक्ट्रेट का संयुक्त कार्यालय होगा रेनोवेट
एक साथ तीन टेबल पर होंगे ऑपरेशन…
नेत्र रोग विभाग के विभागध्यक्ष डॉ. परवेज खान ने बताया कि,अस्पताल में मरीजों की भारी भीड़ को देखते हुए अक्सर ऑपरेशन के लिए हफ्तों बाद की तारीख मिलती थी। अब विभाग की क्षमता को बढ़ाते हुए ऐसी व्यवस्था की गई है कि एक साथ तीन ऑपरेशन टेबल पर सर्जरी की जा सकेगी।

