UTTAR PRADESH NEWS: कानपुर के अधिकारियों के लिए बुधवार का दिन ठीक नहीं रहा।
पहले दो एआरटीओ निलंबित कर दिया गया। इसके बाद समाज कल्याण अधिकारी के भी निलंबित किए जाने की पुष्टि हुई। समाज कल्याण अधिकारी शिवम सागर मंत्री असीम अरुण के दौरे में गैरहाजिर रहने से चर्चा में आए थे।
प्रदेश के 75 जिलों में कानपुर को 70वीं रैंक
बताया जा रहा है कि समाज कल्याण अधिकारी (Social Welfare Officer) शिवम सागर लम्बे समय तक बिना बताए अनुपस्थित रहने के कारण DM जितेंद्र प्रताप सिंह की रिपोर्ट के बाद प्रमुख सचिव अनुराग यादव ने निलंबित किया।
समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण के कानपुर दौरे के दौरान गैरहाजिर रहना जिला समाज कल्याण अधिकारी शिवम सागर को भारी पड़ गया। लंबे समय तक बिना सूचना के कार्यालय से अनुपस्थित रहने और मंत्री के निरीक्षण कार्यक्रम में मौजूद न होने के मामले में DM की रिपोर्ट के बाद शासन ने शिवम सागर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।
शासन को डीएम ने भेजी थी रिपोर्ट
बताया गया कि शिवम सागर लंबे समय से बिना समुचित सूचना के अनुपस्थित चल रहे थे। उनकी अनुपस्थिति और कार्यों में लापरवाही को लेकर DM जितेंद्र प्रताप सिंह ने शासन को रिपोर्ट भेजी। इसके बाद शासन स्तर पर मामले की जांच और स्पष्टीकरण की प्रक्रिया शुरू की गई। 28 जुलाई को शिवम सागर को स्पष्टीकरण उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन निर्धारित समय में उनकी ओर से कोई स्पष्टीकरण प्रस्तुत नहीं किया गया।
कार्यप्रणाली पर भी गंभीर टिप्पणी
शासन के आदेश में शिवम सागर की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर टिप्पणी की गई है। मामला उस समय तूल पकड़ गया था, जब 16 अगस्त को समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण कानपुर के भ्रमण और निरीक्षण पर आए थे। मंत्री के कार्यक्रम में विभागीय योजनाओं की समीक्षा और उनकी प्रगति का जायजा लिया जाना था। कार्यक्रम की पूर्व सूचना होने के बावजूद जिला समाज कल्याण अधिकारी शिवम सागर मौके पर उपस्थित नहीं थे। विभाग के जिला स्तरीय अधिकारी के मंत्री के महत्वपूर्ण दौरे में अनुपस्थित रहने को प्रशासन ने गंभीरता से लिया।
मुख्यालय छोड़ने पर रोक
मंत्री असीम अरुण के दौरे में अनुपस्थिति को शासन ने शासकीय दायित्वों के प्रति गंभीर उदासीनता और अनुशासनहीनता माना। प्रमुख सचिव अनुराग यादव ने उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1999 के तहत शिवम सागर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। उनके खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू की जाएगी। निलंबन अवधि में उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा। साथ ही निलंबन के दौरान बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति के मुख्यालय छोड़ने पर रोक रहेगी।

