Chaitra Navratri 2026 Day 3 Maa Chandraghanta Puja : सनातन धर्म में चैत्र नवरात्र मां दुर्गा को समर्पित है। चैत्र नवरात्र (Chaitra Navratri) हर साल चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होता है। Chaitra Navratri 2026 Day 3 Maa Chandraghanta Puja
चैत्र नवरात्र में अखंड ज्योति जलाने से सभी मनोकामनाएं होंगी पूरी
पतंजलि विज्ञापन केस में रामदेव-बालकृष्ण का माफीनामा खारिज
चैत्र नवरात्र के दौरान माता रानी के नौ रूपों को एक-एक दिन पूजा और व्रत करने का विधान है। यही कारण है कि नवरात्र का तीसरा दिन मां चंद्रघंटा को समर्पित है। इस दिन मां चंद्रघंटा का पूजन किया जाता है। साथ ही जीवन में सुख और आराम के लिए व्रत किया जाता है। आइए, जानते हैं मां चंद्रघंटा का स्वरूप और पूजा विधि के बारे में। Chaitra Navratri 2026 Day 3 Maa Chandraghanta Puja
मां चंद्रघंटा की पूजा से मिलते हैं फायदे
नियमानुसार, चैत्र नवरात्र के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विधिपूर्वक पूजा और व्रत करने से साधक को जीवन में आध्यात्मिक शक्ति मिलती है. मां चंद्रघंटा अपने भक्तों से प्रसन्न होकर उन्हें शांति और समृद्धि प्रदान करती हैं।
नवरात्र पर दिखें ये संकेत, तो समझिए…
ऐसा है मां चंद्रघंटा का स्वरूप
मां चंद्रघंटा का स्वरूप अतुलनीय और अलौकिक है। धार्मिक मान्यता है कि मां चंद्रघंटा संसार में न्याय और अनुशासन स्थापित करती हैं। उनकी 10 भुजाएं अस्त्र-शस्त्रों से सुशोभित हैं। वह देवी पार्वती का विवाहित रूप हैं। मां चंद्रघंटा सिंह पर विराजमान हैं। देवों के देव महादेव से विवाह करने के बाद मां चंद्रघंटा ने अपने माथे को अर्धचंद्र से सजाया था।
इन मंत्रों का जप करें, सभी संकटों से मिलेगी निजात
पूजा विधि
चैत्र नवरात्र के तीसरे दिन सूर्योदय से पहले उठें और दिन की शुरुआत देवी-देवता के ध्यान से करें।
इसके बाद स्नान कर साफ वस्त्र धारण करें।
अब मंदिर की सफाई कर गंगाजल का छिड़काव करें।
मां को फूलमाला अर्पित करें।
सिन्दूर या कुमकुम लगाएं।
श्रृंगार का सामान अर्पित करें।
देसी घी का दीपक जलाएं
अब आरती करें और दुर्गा चालीसा का पाठ करें।
फल और मिठाई का भोग लगाएं
इसके बाद प्रसाद का वितरण करें।
चैत्र नवरात्र में मां शैलपुत्री के इस मंदिर का दर्शन करें, तो पूरी होगी हर मनोकामना
धन में वृद्धि चाहते हैं, तो जानें नौ देवियों को किस दिन क्या लगाएं भोग
मां चंद्रघंटा मंत्र
पिण्डज प्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।
प्रसादं तनुते मह्यम् चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥
या देवी सर्वभूतेषु माँ चन्द्रघण्टा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
डिसक्लेमर: ‘इस लेख में निहित किसी भी जानकारी/सामग्री/गणना की सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है, इसके उपयोगकर्ता इसे महज सूचना समझकर ही लें।

