Lairai Temple: गोवा के लैराई मंदिर (Lairai Devi Temple) में हर साल मई के महीने में जात्रा उत्सव का आयोजन किया जाता है, जिसमें अधिक संख्या में भक्त शामिल होते हैं। Lairai Temple
इस मंदिर में बांधकर रखा गया है कलश, अद्भुत है वजह
आइए जानते हैं कि जात्रा उत्सव में क्या होता है और लैराई मंदिर से जुड़ी खास बातों के बारे में विस्तार से।
लैराई मंदिर में किसकी होती है पूजा? (Who is worshipped in Lairai temple?)
गोवा के शिरगाओ गांव में लैराई मंदिर स्थित है। इस मंदिर में लैराई देवी की पूजा-अर्चना होती है। यह मंदिर लोगों के बीच आस्था का केंद्र बना हुआ है। मंदिर में मई में जात्रा उत्सव बेहद उत्साह के साथ मनाया जाता है।
जानिए, बेहद चमत्कारी है अचलेश्वर महादेव मंदिर
क्या है लैराई उत्सव (What is Larai Festival?)
हर वर्ष वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर लैराई देवी जात्रा आयोजित की जाती है। इस उत्सव के दौरान लोग नंगे पैर अंगारों पर चलते हैं और देवी लैराई को सम्मान देते हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह एक गोवा की आध्यात्मिकता और संस्कृति का हिस्सा है। देवी लैराई को मां पार्वती का रूप माना जाता है। इस उत्सव के समय मंदिर में प्रसाद का वितरण, मंत्रों का जप और ढोल नगाड़े बजाए जाते हैं।
अंगारों पर चलने के लिए लोगों को अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है। सुबह से ही अनुष्ठान कार्यक्रम शुरू हो जाते हैं। गर्म अंगारों पर चलते समय लोग देवी लैराई के नाम का ध्यान करते हैं। जो लोग इस दौड़ को पूरी कर लेता है। वे लोग फूलों की माला उतारकर वट के पेड़ पर फेंक देते हैं, जिसके बाद घर वापस आते हैं।
कब से शुरू हो रहे हैं चैत्र नवरात्र? जानिए पूजा विधि और शुभ मुहूर्त
क्यों प्रसिद्ध है मंदिर (Why is the temple famous)
उत्सव के मंदिर में बेहद खास रौनक देखने को मिलती है। अंगारों पर चलने की वजह से ही लैराई मंदिर प्रसिद्ध है। यह उत्सव मई के शुरुआती दिनों में आयोजित होता है। इस उत्सव में शामिल होने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं। धार्मिक अनुष्ठान भी किए जाते हैं।
घर में शिवलिंग रखने से पहले जान लें वास्तु के ये नियम
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। JAIHINDTIMES यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं।

