LUCKNOW NEWS : सड़कों पर अब निजी स्टेज कैरिज, टूरिस्ट और कॉन्ट्रैक्ट कैरिज बसें खड़ी नहीं होंगी। यूपी सरकार की बस अड्डा एवं पार्किंग नीति 2025 को अमलीजामा पहनाने के लिए ज़िला स्तर पर कमेटियां गठित कर दी गई हैं। लखनऊ में DM VISHAKH JI की अध्यक्षता में गुरुवार को समिति की बैठक हुई जिसमें पूरी कार्ययोजना तय की गई।
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बैठक में बताया गया कि निजी बसों के लिए प्रदेश में कोई समुचित बस अड्डा या पार्किंग सुविधा नहीं है, जिससे ये बसें सड़कों या सार्वजनिक स्थलों पर खड़ी होती हैं। इससे ट्रैफिक व्यवस्था बाधित होती है और सुरक्षा को भी खतरा होता है।अब नीति के तहत लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) के मास्टर प्लान में चिन्हित 165 एकड़ भूमि पर निजी बस अड्डे बनाए जाएंगे।
जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि इस भूमि की तहसील स्तर पर जांच कराई जाए और 20 जून तक निवेशकों के साथ बैठक कर प्रस्तावों पर मंथन किया जाए।
योजना को लेकर इन नियम को फॉलो करना होगा
2 एकड़ जमीन पर बनेंगे निजी बस अड्डे, जिसकी 70% जगह पार्किंग के लिए आरक्षित होगी।
आवेदक की नेटवर्थ कम से कम ₹50 लाख और टर्नओवर ₹2 करोड़ जरूरी।
जमीन या तो स्वामित्व में हो या 10 साल की लीज पर।
आवेदक को न्यूनतम 2 साल का अनुभव आवश्यक होगा।
बस अड्डों में यात्रियों के लिए टॉयलेट, पेयजल, कैन्टीन, CCTV, जनरेटर, फायर सेफ्टी और सुरक्षा आदि सुविधाएं अनिवार्य होंगी।
बैठक में बताया गया कि अब ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट वाली बसें पूरे देश में बिना अतिरिक्त टैक्स चल सकती हैं, जिससे इनकी संख्या तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में इनके लिए भी तय पार्किंग की ज़रूरत बढ़ी है।
शहर के बाहर नहीं, 5 किमी के दायरे में ही बस अड्डा
नई नीति के अनुसार, प्रस्तावित निजी बस अड्डा नगर सीमा से 5 किमी के भीतर होना चाहिए ताकि यात्रियों को आसानी रहे।
समिति का विवरण
जिलाधिकारी (अध्यक्ष)
1 पुलिस आयुक्त द्वारा नामित (सदस्य)
2 नगर आयुक्त/सचिव विकास प्राधिकरण/अधिशासी अधिकारी/नगर पालिका परिषद/नगर पंचायत सचिव (सदस्य सचिव)
3 संबंधित तहसील के उप जिलाधिकारी (सदस्य)
4 संबंधित सर्किल के पुलिस क्षेत्राधिकारी (सदस्य)
5 सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी प्रवर्तन (सदस्य)
6 सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक (सदस्य)
7 अधिशासी अभियंता लोक निर्माण विभाग (सदस्य)
8 अध्यक्ष नियामक प्राधिकारी/जिलाधिकारी द्वारा नामित कोई विषय विशेषज्ञ (सदस्य)
बैठक में सचिव एलडीए, अपर नगर आयुक्त, एसपी ट्रैफिक, एआरटीओ, सभी एसडीएम और रोडवेज अधिकारी मौजूद रहे। डीएम ने निर्देश दिए कि नगर निगम और उपजिलाधिकारी ऐसी ज़मीनें भी चिन्हित करें जिन्हें बस अड्डों के रूप में विकसित किया जा सकता है।
अब आगे क्या?
20 जून तक इच्छुक निजी निवेशकों के साथ बैठक कर प्रपोजल लिए जाएंगे। इसके बाद प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि अगले एक साल में हर जिले में कम से कम एक निजी बस अड्डा स्थापित हो जाए।

