Ekadashi of the Ashad Krishna Paksha: आषाढ़ कृष्ण एकादशी शनिवार को ज्योतिषीय, धार्मिक और खगोलीय दृष्टि से महत्वपूर्ण दिन है। ग्रहों के अधिपति सूर्यदेव उत्तरायण से दक्षिणायन होंगे। Ekadashi of the Ashad Krishna Paksha
शनिवार को दिन 13 घंटे का होगा। कल 22 जून को दोपहर 1.54 बजे सूर्य आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे।
Ekadashi of the Ashad Krishna Paksha
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पर्याप्त वर्षा, आंतरिक ऊर्जा में संतुलन बनेगा
सूर्य के आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश करने के साथ पर्याप्त वर्षा, आंतरिक ऊर्जा में संतुलन बनेगा। किसानों के लिए आर्द्रा नक्षत्र लाभकारी होगा। ज्योतिष आचार्य पंडित राकेश झा ने बताया कि शनिवार को मकर रेखा पर सूर्य लंबवत है। ऐसे में 21 जून को वर्ष का सबसे लंबा दिन और रात छोटी होगी। दिन की अवधि 13 घंटे की और रात 11 घंटे की होगी।
बीज बोना, खेती करना शुभ माना जाता
सूर्य के दक्षिणायन के समय वैवस्वत मन्वंतर की शुरुआत मानी जाती है। 22 जून रविवार की दोपहर 1.45 बजे सूर्य सुकर्मा योग की उपस्थिति में आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। इस नक्षत्र में कृषि कार्य के लिए बीज बोना, खेती करना शुभ माना जाता है। सूर्य के आर्द्रा नक्षत्र में होने के साथ बुध और गुुरु एक साथ होना अच्छी वर्षा के संकेत है।
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वहीं, रविवार 22 जून को शाम 4:14 बजे सूर्य आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। पंडितों के अनुसार यह संयोग मेष, मिथुन, कर्क, तुला और मीन राशियों के लिए शुभ है। इससे वर्षा, कृषि और आंतरिक ऊर्जा में संतुलन आएगा, जो किसानों के लिए सकारत्मक रहेगा।
पंडितों के अनुसार 21 जून को ग्रीष्म अयनांत (मकर रेखा पर सूर्य लंबवत ) है। भारत में यह साल का सबसे लंबा दिन और सबसे छोटी रात होगी। दिन की अवधि 13 घंटे से अधिक और रात लगभग 11 घंटे की रहेगी। इसके बाद दिन छोटे और रातें लंबी होती जाएंगी।सूर्य के दक्षिणायन के समय वैवस्वत मन्वंतर की शुरुआत मानी जाती है। यह वर्तमान में चल रहा सातवां मन्वंतर है, जो 71 चतुर्युगी तक चलता है और ब्रह्मा के एक दिन (कल्प) का एक भाग होता है। यह है धार्मिक मान्यता और परंपरा पं. ने बताया कि सूर्य का दक्षिणायन और आर्द्रा में प्रवेश धार्मिक रूप से भी महत्वपूर्ण होता है।
धार्मिक मान्यता और परंपरा
पूर्वांचल सहित कई क्षेत्रों में इस अवसर पर पारंपरिक “आर्द्रा नक्षत्र थाली” बनाई जाती है, जिसमें दलपूरी, खीर, मौसमी सब्जियां और आम होते हैं। मत्स्य पुराण के अनुसार, यह काल देवी-देवताओं की पूजा के लिए विशेष रूप से शुभ होता है और इस समय की गई उपासना से मनोकामनाएं शीघ्र पूरी होती हैं।
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