GSVM COLLEGE NEWS : GSVM मेडिकल कॉलेज के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग ने बुधवार को एक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें प्रथम वर्ष के एम.एस. रेजिडेंट्स को प्रसव के बाद होने वाले भारी रक्तस्राव (PPH) के प्रबंधन का अभ्यास कराया गया। GSVM COLLEGE NEWS
कार्यक्रम में PPH ड्रिल के व्यावहारिक सत्र शामिल थे, जिससे रेजिडेंट्स को आपातकालीन स्थितियों में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई का अनुभव मिला।
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प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य रेजिडेंट्स को PPH की समय पर पहचान, जोखिम मूल्यांकन और चरणबद्ध प्रबंधन में कुशल बनाना था। इसमें दवाओं का उचित उपयोग, रक्त और रक्त उत्पादों का प्रबंधन, तथा आवश्यक शल्य हस्तक्षेप शामिल थे।
वरिष्ठ संकाय ने टीमवर्क और संचार कौशल के महत्व पर जोर दिया, यह बताते हुए कि माताओं की जान बचाने में तकनीकी ज्ञान के साथ-साथ सामंजस्यपूर्ण टीम कार्य और त्वरित निर्णय क्षमता भी महत्वपूर्ण है।
भारत में PPH मातृ मृत्यु का एक प्रमुख कारण है। आंकड़ों के अनुसार, PPH के कारण प्रति वर्ष लगभग 12,000 महिलाएं अपनी जान गंवा देती हैं। देश में PPH से होने वाली मातृ मृत्यु का हिस्सा 30-38% तक है। साधारण प्रसव में इसका खतरा 2-4% और सीज़ेरियन में लगभग 6% होता है, जो ग्रामीण और उच्च जोखिम वाली आबादी में अधिक पाया जाता है।
वरिष्ठ चिकित्सकों के अनुसार, इस प्रशिक्षण से युवा डॉक्टरों की व्यावहारिक दक्षता, त्वरित निर्णय क्षमता और टीम-आधारित कार्रवाई में सुधार होगा। इससे PPH से संबंधित मातृ मृत्यु दर और जटिलताओं का खतरा कम होने की उम्मीद है। विभाग की योजना है कि सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा देने के लिए ऐसे कौशल-आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रमों को नियमित रूप से आयोजित किया जाए।
इस कार्यक्रम ने साबित कर दिया कि सिर्फ तकनीकी ज्ञान पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रैक्टिकल अनुभव और टीम के साथ तालमेल ही माताओं की जान बचाने की असली ताकत है। GSVM मेडिकल कॉलेज की यह पहल कानपुर में मातृत्व सुरक्षा के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत कर रही है।

