High Court News : पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने जिला और ट्रायल कोर्ट की संवैधानिक गरिमा और सम्मान को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।
हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है कि पंजाब, हरियाणा और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ में हाईकोर्ट को छोड़कर अन्य सभी अदालतों को अब आधिकारिक रूप से जिला न्यायालय, जिला न्यायपालिका या ट्रायल कोर्ट कहा जाएगा। अदालत ने स्पष्ट किया है कि सबऑर्डिनेट जज, सबऑर्डिनेट कोर्ट या लोअर कोर्ट जैसे शब्दों का प्रयोग अब किसी भी आधिकारिक पत्राचार या न्यायिक कार्यवाही में नहीं किया जाएगा।
Punjab and Haryana High Court की वेबसाइट पर 14 जनवरी 2026 को अपलोड किए गए सर्कुलर में कहा गया है कि मुख्य न्यायाधीश और अन्य न्यायाधीशों के निर्देशों के तहत हाईकोर्ट के अधीन कार्यरत सभी अदालतों के लिए नई शब्दावली अपनाई जाएगी। सर्कुलर में यह भी स्पष्ट किया गया है कि इन शब्दों का प्रयोग केवल अपरिहार्य परिस्थितियों में ही किया जा सकता है।
इससे पहले वर्ष 2024 में सुप्रीम कोर्ट की न्यायमूर्ति अभय एस ओका और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने भी निर्देश दिए थे कि ट्रायल कोर्ट को लोअर कोर्ट नहीं कहा जाना चाहिए। बाद में पीठ ने यह भी कहा था कि किसी भी अदालत को लोअर कोर्ट कहना संविधान की भावना के विपरीत है। इसी वर्ष तत्कालीन भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने भी जिला न्यायपालिका को न्याय व्यवस्था की रीढ़ बताते हुए कहा था कि उसे सबऑर्डिनेट कहना बंद किया जाना चाहिए। High Court News
उन्होंने कहा था कि जैसे शरीर के लिए रीढ़ आवश्यक है, वैसे ही न्याय व्यवस्था के लिए जिला न्यायपालिका अनिवार्य है। हाईकोर्ट के इस फैसले से न्यायपालिका के विभिन्न स्तरों के बीच समानता, सम्मान और संवैधानिक मूल्यों को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

