KANPUR NEWS : आपदा राहत व्यवस्था कानपुर नगर में ज़मीन पर असर दिखा रही है। सर्पदंश से हुई पशु हानि और जनहानि के मामलों में बीते तीन वित्तीय वर्षों के दौरान कुल 73.65 लाख की राहत राशि दैवीय आपदा मोचन निधि (SDRF) से सीधे प्रभावित परिवारों के बैंक खातों में भेजी गई है।
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DM JP SINGH ने कहा कि शासन के निर्देश पर सर्पदंश से जनहानि और पशु हानि के मामलों में दैवीय आपदा मोचन निधि से पात्र परिवारों को समय पर सहायता दी जा रही है। प्रशासन यह सुनिश्चित कर रहा है कि सहायता बिना किसी देरी के सीधे खातों में पहुंचे।
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जनहानि पर भी पूरी सहायता
सर्पदंश से हुई जनहानि के मामलों में भी योगी सरकार की नीति के तहत राहत दी गई। कुल 14 जनहानियों पर 56 लाख की सहायता दी गई। 2025–26 जनहानि के 9 मामले आए। इसमें 36 लाख रुपए की सहायता राशि दी गई। 2023–24 जनहानि के 5 मामले सामने आए। 20 लाख रुपए की सहायता राशि प्रदान की गई। 2024–25 जनहानि के एक भी मामले सामने नहीं आए।
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प्राथमिकता में हैं पशु हानि के मामले
प्रशासन ने सर्पदंश से पशु मृत्यु के मामलों को प्राथमिकता पर लिया। तीन वर्षों में कुल 46 पशु हानियों पर 17,65,000 की सहायता राशि दी गई। 2025–26 की बात करें तो 28 पशुओं की मौत हुई। 10 लाख 90 हज़ार रुपए की राहत राशि दी गई। 2024–25 पशु हानि के 13 मामले सामने आए। 4,87,500 रुपये की सहायता राशि दी गई। 2023–24 पशु हानि के 05 मामले आए। राहत राशि 1,87,500 रुपये प्रदान की गई।
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इन इलाकों के पशुपालकों को मिला लाभ
राहत पाने वालों में बिल्हौर, घाटमपुर और नरवल तहसील के पशुपालक शामिल हैं। समय पर मिली इस सहायता से प्रभावित परिवार चारा-दवा की व्यवस्था, घर का खर्च और दोबारा पशुपालन कर पाने में सक्षम हुए हैं।
घाटमपुर के राजू प्रसाद उमराव (कुम्हकारा) कहते हैं, सांप काटने से भैंस मर गई थी। घर की कमाई रुक गई थी। सरकारी मदद मिली तो दोबारा काम शुरू करने की हिम्मत आई। वहीं, नरवल के रामपाल बताते हैं, पहले लगा था कुछ नहीं मिलेगा, लेकिन जांच के बाद पैसा सीधे खाते में आ गया। इससे बड़ा सहारा मिला।
क्या है दैवीय आपदा मोचन निधि
दैवीय आपदा मोचन निधि वह सरकारी कोष है, जिससे सर्पदंश, प्राकृतिक आपदा, जल में डूबना जैसी घटनाओं में जनहानि और पशु हानि पर आर्थिक सहायता दी जाती है।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सर्पदंश की स्थिति में झाड़-फूंक, तंत्र-मंत्र के चक्कर में देरी ना करें। तुरंत नज़दीकी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल ले जाना ज़रूरी है। सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर एंटी-स्नेक वेनम दवाएं उपलब्ध हैं।
सहायता मिलने की प्रक्रिया
सर्पदंश के घटना की सूचना ग्राम प्रधान, लेखपाल या तहसील को दी जाती है।
राजस्व व पशुपालन विभाग की टीम मौके पर जांच करती है।
रिपोर्ट स्वीकृत होने पर डीबीटी के जरिए पैसा सीधे बैंक खाते में भेजा जाता है।

