KANPUR GSVM COLLEGE NEWS: तरक्की और बेहतर परिणाम के लिए एआई का इस्तेमाल बेहद जरूरी है। जैसे-जैसे एआई का दायरा और उपयोग बढ़ रहा है, वैसे-वैसे यह लोग खासकर युवाओं को इसका आदी भी बना रहा है, जोकि बेहद गलत है। KANPUR GSVM COLLEGE NEWS
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इसका उपयोग करें पर सिर्फ मदद और सहयोग के इरादे से। आमतौर पर देखा जा रहा है कि लोग इसके इस्तेमाल को दिनचर्या में शामिल कर चुके हैं। खुद से ज्यादा एआई पर भरोसा करने लगे हैं। खासकर युवाओं के लिए यह स्थिति ठीक नहीं है। कई मामले ऐसे सामने आ रहे हैं, जिसमें एआई ने दिमाग को गुलाम यानी कुंद बना रखा है। खुद के सोचने-समझने के बदले इसके भरोसे काम करना अधिक आसान और गुणवत्तापूर्ण माना जा रहा है।
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यह दावा जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज (gsvm medical college news) में शुक्रवार को फार्मेसी विभाग की ओर से आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विवि के प्रोफेसर डॉ गौरव कैथवास ने किया। उन्होंने कहा कि इस तकनीक को खुद पर हावी कतई न होने दें। दिनभर इसके सहारे काम करने की आदत दिमाग को दीमक की तरह खोखला कर रही है। उन्होंने रिसर्च करने वालों को सलाह दी कि एआई के भरोसे न रहें।
रिसर्च में एआई (AI) के इस्तेमाल से कई ऐसी गलतियां भी संभव हैं, जिससे प्रतिभा पर सवाल खड़े होंगे। उन्होंने बताया कि एआई की मदद से तैयार रिसर्च में कई गड़बड़ियां पकड़ी जा रही हैं। वहीं इंडियन फार्माकोपिया आयोग के वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. शशि भूषण ने दवाओं के दुष्प्रभावों की निगरानी और सूचना प्रणाली को रोगी सुरक्षा की आधारशिला बताया। सीएसआईआर-केंद्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान के ने मुख्य वैज्ञानिक डॉ. मनीष के. चौरसिया ने लक्षित औषधि वितरण प्रणाली और औषध गतिकी के आधुनिक दृष्टिकोणों पर प्रकाश डाला।
डॉ. नारायण प्रसाद यादव, वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक, सीएसआईआर-केंद्रीय औषधीय एवं सगंध पादप संस्थान ने सोरायसिस के लिए गैर-स्टेरॉयडीय पादप आधारित औषधि विकास और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया।

