KANPUR NEWS: कानपुर नगर में ईवीएम और वीवीपैट मशीनों की प्रथम स्तरीय जांच (एफएलसी) शुक्रवार को दूसरे दिन भी जारी रही।
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भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड के अधिकृत इंजीनियर एक-एक मशीन की तकनीकी जांच कर उसकी कार्यक्षमता परख रहे हैं। पूरी प्रक्रिया राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में कराई जा रही है और इसकी ऑनलाइन निगरानी भी की जा रही है।
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एफएलसी के दौरान भारत निर्वाचन आयोग से आए प्रेक्षकों का दल, जिला निर्वाचन अधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह, उप जिला निर्वाचन अधिकारी डॉ. विवेक चतुर्वेदी के साथ समाजवादी पार्टी, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, अपना दल, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के प्रतिनिधि मौजूद रहे। अधिकारियों एवं राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने मशीनों की जांच और परीक्षण की प्रक्रिया देखी।
जनपद में प्रस्तावित 3736 पोलिंग बूथों के लिए 5417 ईवीएम एवं वीवीपैट मशीनों की चरणबद्ध जांच की प्रक्रिया 17 सितंबर से प्रारंभ हुई है। भारत निर्वाचन आयोग के निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड के अधिकृत इंजीनियर मशीनों के विभिन्न तकनीकी पहलुओं की जांच कर रहे हैं। किसी मशीन को उपयोग योग्य मानने से पहले उसकी कार्यशीलता का परीक्षण किया जा रहा है।
प्रथम स्तरीय जांच में तकनीकी परीक्षण के बाद मशीनों में वोट डालकर यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि मशीनें सही तरीके से काम कर रही हैं। मशीन की कार्यशीलता की पुष्टि होने के बाद कंट्रोल यूनिट को पिंक पेपर सील से सील कर सुरक्षित रखा जा रहा है। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को मशीनों की जांच और उनके संचालन को देखने का अवसर दिया जा रहा है।
FLC में मशीनों की सामान्य तकनीकी जांच के साथ रैंडम तरीके से चयनित मशीनों का विस्तृत परीक्षण भी किया जाता है। राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों द्वारा रैंडम चयनित मशीनों में से 2 प्रतिशत मशीनों पर 500 वोट, 2 प्रतिशत मशीनों पर 1000 वोट और 1 प्रतिशत मशीनों पर 1200 वोट डालकर उनकी कार्यक्षमता का परीक्षण किया जाता है। इस तरह रैंडम चयनित कुल 5 प्रतिशत मशीनों पर अधिक संख्या में वोट डालकर उन्हें परखा जाता है।
प्रथम स्तरीय जांच पूरी होने के बाद जांच में सही पाई गई अन्य मशीनों को भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप ईवीएम वेयरहाउस में सीलबंद कर सुरक्षित रखा जाएगा।
इसके बाद निर्धारित चरण में ईवीएम प्रबंधन प्रणाली के माध्यम से प्रथम रैंडमाइजेशन किया जाता है। यह प्रक्रिया राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों और जिला निर्वाचन अधिकारी की मौजूदगी में होती है। प्रथम रैंडमाइजेशन के माध्यम से ईवीएम और वीवीपैट का विधानसभा क्षेत्रवार आवंटन किया जाता है।

